उत्तराखंड के हरिद्वार और देहरादून जिलों में जनगणना की ड्यूटी में लगे शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने एक नया और चुनौतीपूर्ण आदेश जारी किया है। CEO हरिद्वार नरेश कुमार हल्दियानी ने निर्देश दिए हैं कि जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को स्कूल के मूल कार्यों से कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। अब इन शिक्षकों को स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ जनगणना की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इस फैसले से शिक्षक समुदाय में भारी नाराजगी है। शिक्षकों का तर्क है कि जनगणना जैसा बड़ा काम और स्कूल की पढ़ाई एक साथ करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, इससे न केवल काम की गुणवत्ता प्रभावित होगी बल्कि छात्रों की पढ़ाई का भी नुकसान होगा।
शिक्षकों का विरोध और व्यावहारिक चुनौतियाँ
शिक्षकों का कहना है कि जनगणना के तहत घरों की नंबरिंग और लिस्टिंग का काम काफी समय लेने वाला होता है। कई शिक्षकों की ड्यूटी उनके स्कूल वाले क्षेत्र से काफी दूर लगाई गई है, ऐसे में एक ही समय पर दो अलग-अलग जगहों पर जिम्मेदारी निभाना नामुमकिन है। राजकीय शिक्षक संघ के महामंत्री रमेश पैन्यूली ने भी इसे अनुचित बताते हुए कहा है कि शिक्षकों पर इस तरह का दोहरा दबाव डालना ठीक नहीं है।
क्या हैं विभाग के कड़े निर्देश?
मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, शिक्षकों को स्कूल और जनगणना दोनों कार्यों को सामंजस्य बिठाकर पूरा करना होगा। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि जनगणना कार्य में लापरवाही बरती गई या उसे समय पर पूरा नहीं किया गया, तो नियमों के तहत तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, अगर स्कूल में पढ़ाई प्रभावित हुई तो विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
जनगणना अभियान का शेड्यूल
उत्तराखंड में जनगणना के काम की शुरुआत 25 अप्रैल से हो चुकी है। इस चरण में मकानों की गणना की जानी है, जिसे 24 मई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, कुछ जिलों के अधिकारियों ने शिक्षकों को कार्यमुक्त करने के आदेश दिए थे ताकि काम बिना किसी बाधा के पूरा हो सके, लेकिन हरिद्वार और देहरादून के नए निर्देशों ने शिक्षकों के सामने संकट पैदा कर दिया है।
विवाद पर अधिकारियों की सफाई
इस पूरे विवाद पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने कहा है कि उन्हें सीईओ के इस आदेश की पूरी जानकारी नहीं है और इस पर स्पष्टीकरण संबंधित अधिकारी ही दे पाएंगे। दूसरी ओर, सीईओ नरेश कुमार का कहना है कि जिस दिन शिक्षक जनगणना का काम करेंगे, उस दिन उन पर स्कूल में पढ़ाने का बोझ नहीं डाला जाएगा, ताकि काम का संतुलन बना रहे।

