गो सेवा आयोग उपाध्यक्ष ने नगर निकायों को जारी किए निर्देश

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राज्य में गौवंश के वृद्ध, बीमार अशक्त एवं अलाभकारी होने की स्थिति में पशुपालकों एवं डेरी संचालकों द्वारा सड़कों पर आवारा छोड़ दिया जाता है, जिनमें छोटे नर गौवंश भी सम्मिलित होते हैं।जबकि राज्य में पशु क्रूरता को रोकने हेतु उत्तराखण्ड गोवंश संरक्षण अधिनियम, 2007 प्रभावी है, जिसकी धारा-7 की उपधारा (क) एवं (ख) के तहत कोई भी व्यक्ति “गोवंश को आवारा नहीं छोड़ेगा तथा “गाय को दुहने के पश्चात स्वतन्त्र विचरण नहीं करने देगा। उक्त के अतिरिक्त इस अधिनियम, 2007 की धारा 8 के तहत राज्य के सभी शहरी क्षेत्रों में ही गोवंश पालन हेतु गोवंश का पंजीकरण कराने की बाध्यता है

यदि कोई व्यक्ति सम्बंधित धारा-7 एवं 8 के उपबंधों का उल्लंघन करता है तो उसे “उत्तराखण्ड गो वंश संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2015 के तहत जुर्माना जो रू० 2000/ जुर्माना वसूला जाएगा।। राज्य गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजेन्द्र अंडथ्वाल ने समस्त नगर निगम / नगर पालिका परिषदों / नगर पंचायतों में चल रही स्वच्छता अभियान की गाड़ियों के माध्यम से सप्ताह में दो बार उक्त धाराओं एवं कानुनी प्रावधानों का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार करते हुए जागरूकता अभियान चलाया जाय तथा ऐसे पशुपालकों / डेयरी संचालकों को चिन्हित कर उनके विरूद्ध सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत कार्यवाही के निर्देश दिए है