उत्तराखंड में बाघों के बढ़ते आतंक पर राजनीति तेज, यशपाल आर्य ने धामी सरकार को घेरा

ख़बर शेयर करें

उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बाघों के बढ़ते हमलों ने जनता के बीच भारी दहशत पैदा कर दी है। इस गंभीर मुद्दे पर विपक्ष के नेता यशपाल आर्य ने राज्य की धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार और प्रशासन को ‘निष्क्रिय’ बताते हुए चेतावनी दी है कि शासन की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आर्य का तर्क है कि वन्यजीव संरक्षण महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे इंसानी जान की कीमत पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि क्या आम जनता की जान की कोई कीमत नहीं है?

यह भी पढ़ें -  बाल संरक्षण आयोग का मदरसा निरीक्षण: बदहाली देख अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने जताई नाराजगी

ग्रामीण क्षेत्रों में डर का माहौल और बच्चों की सुरक्षा

यशपाल आर्य ने बताया कि दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में बाघ का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग जंगलों में जाने से डर रहे हैं। इसका सबसे बुरा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है, क्योंकि डर के कारण बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है। महिलाएं और बुजुर्ग भी हर वक्त डर के साये में जीने को मजबूर हैं।

यह भी पढ़ें -  भारत में हर साल पैदा हो रहा 1.56 करोड़ टन जहरीला कचरा, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

सरकार से की गई मुख्य मांगें

विपक्ष के नेता ने सरकार के सामने कुछ ठोस मांगें रखी हैं ताकि जनता को सुरक्षा मिल सके:

  • गश्त और पेट्रोलिंग: संवेदनशील और प्रभावित इलाकों में वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाए।
  • रैपिड रिस्पांस टीम: हर प्रभावित क्षेत्र में एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम (RRT) की तैनाती की जाए।
  • सुरक्षा उपकरण: ग्रामीणों को अपनी रक्षा के लिए जरूरी सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाएं।
यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड पुलिस में हड़कंप: IPS लोकेश्वर सिंह के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज

प्रशासनिक विफलता की चेतावनी

आर्य ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, तो इसे न केवल प्रशासनिक विफलता माना जाएगा, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं की हार भी होगी। उन्होंने जोर दिया कि सरकार को अपनी जवाबदेही फाइलों से बाहर निकलकर धरातल पर साबित करनी होगी।

ADVERTISEMENTS Ad