उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने देहरादून की आजाद कॉलोनी स्थित एक मदरसे का औचक निरीक्षण किया, जहाँ की स्थिति अत्यंत चिंताजनक पाई गई। निरीक्षण के दौरान बच्चों के रहने के कमरों में गंदगी, रसोई में साफ-सफाई का अभाव और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखी गई। बच्चों के बिस्तर गंदे थे और मदरसे का ढांचा भी जर्जर स्थिति में मिला। आयोग की अध्यक्ष ने इन हालातों पर सख्त नाराजगी व्यक्त की है और बच्चों के स्वास्थ्य व शिक्षा के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को गंभीरता से लिया है।
शिक्षा के स्तर और संसाधनों की कमी
मदरसे में न केवल स्वच्छता, बल्कि शिक्षा का स्तर भी काफी कमजोर पाया गया। निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि बड़ी उम्र के छात्र भी छोटी कक्षाओं में पढ़ने को मजबूर हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि छात्रों के पास हिंदी, अंग्रेजी और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों की किताबें तक उपलब्ध नहीं थीं। प्रबंधन का कहना था कि यहाँ मुख्य रूप से केवल धार्मिक शिक्षा (कुरान शरीफ) दी जाती है, जबकि आधुनिक शिक्षा के लिए आवश्यक शिक्षण सामग्री का पूरी तरह अभाव दिखा।
शिक्षकों की अनुपलब्धता और कागजी खामियां
निरीक्षण के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि मदरसे में नियुक्त शिक्षकों में से एक मौके पर मौजूद नहीं थे। फोन पर बात करने पर पता चला कि शिक्षक पेशे से वकील हैं और समय मिलने पर ही पढ़ाने आते हैं। इसके अलावा, जब आयोग ने मदरसे के संचालन से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज और कागजात मांगे, तो प्रबंधन कोई भी संतोषजनक रिकॉर्ड पेश करने में विफल रहा। मदरसे में बिहार जैसे अन्य राज्यों से आए बच्चे भी पढ़ाई करते हुए मिले, जिनके भविष्य और सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।
अन्य संक्षिप्त समाचार (खबरों के अनुसार):
- चारधाम यात्रा सुरक्षा: सीएम धामी ने सोशल मीडिया पर चारधाम यात्रा के बारे में भ्रामक खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और FIR के निर्देश दिए हैं।
- विधानसभा विशेष सत्र: 28 अप्रैल को होने वाले विशेष सत्र में ‘महिला आरक्षण बिल’ और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा की जाएगी।
- कर्मचारी मांगें: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आठवें वेतन आयोग के लिए ‘एक राष्ट्र, एक वेतन, एक पेंशन’ और फिटमेंट फैक्टर को 3.68 करने का प्रस्ताव शासन को सौंपा है।

