देहरादून सहित उत्तराखंड के मैदानी जिलों में बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए वकीलों के लिए कोर्ट परिसर में ‘काले कोट’ की अनिवार्यता से छूट देने की मांग उठी है। अधिवक्ता शिवा वर्मा ने इस संबंध में शुक्रवार को हाईकोर्ट के महानिबंधक को एक औपचारिक पत्र भेजा है। पत्र में तर्क दिया गया है कि मैदानी इलाकों में पारा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे भारी काला कोट पहनकर अदालती कार्यवाही में शामिल होना वकीलों के लिए काफी मुश्किल और कष्टदायक हो गया है।
स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका
अधिवक्ता ने स्पष्ट किया है कि चिलचिलाती धूप और उमस के बीच काला कोट पहनना न केवल शारीरिक रूप से कठिन है, बल्कि इससे वकीलों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। हीट स्ट्रोक या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को देखते हुए ड्रेस कोड में तात्कालिक बदलाव की जरूरत बताई गई है।
नियमों में है ढील देने का प्रावधान
महानिबंधक को भेजे गए पत्र में कानूनी नियमों का हवाला भी दिया गया है। अधिवक्ता के अनुसार, जनरल रूल्स के अध्याय 27 के नियम 615 के तहत ग्रीष्म ऋतु (Summer Season) में वकीलों के परिधान यानी ड्रेस कोड में शिथिलता या ढील देने का स्पष्ट प्रावधान है। इसी नियम के आधार पर गर्मी के महीनों के लिए राहत प्रदान करने का आग्रह किया गया है।

