देहरादून: उत्तराखंड में जमीन से जुड़े विवादों को लेकर सिस्टम की मंशा और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां सचिव मुख्यमंत्री Vinay Shankar Pandey की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए कि लैंड फ्रॉड और जमीन विवादों में पुलिस हस्तक्षेप नहीं करेगी और ऐसे मामलों को राजस्व विभाग ही सुलझाएगा, वहीं दूसरी ओर पुलिस की सक्रियता इन आदेशों पर सवाल खड़े कर रही है।
बताया जा रहा है कि 7 अप्रैल को इस संबंध में एक अहम बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें Uttarakhand Police के वरिष्ठ अधिकारी, समेत कई आलाधिकारी मौजूद थे। बैठक में साफ तौर पर यह तय किया गया कि जमीन से जुड़े विवादों में पुलिस सीधे दखल नहीं देगी। लेकिन सवाल यह है कि जब आदेश इतने स्पष्ट हैं, तो फिर मैदान में तस्वीर कुछ और क्यों दिख रही है?
हाल ही में सामने आए एक मामले ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। मामला एक रिटायर्ड सेना अधिकारी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें आईजी गढ़वाल की ओर से दिखाई गई सक्रियता ने भौंहें चढ़ा दी हैं। सरकारी आदेशों के बावजूद जिस तरह से इस मामले में पुलिस की तत्परता नजर आई, उसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या नियम-कानून सभी के लिए समान हैं या फिर परिस्थितियों के अनुसार बदल जाते हैं।
आईजी गढ़वाल कार्यालय से जारी एक वीडियो ने तो मानो इस पूरे प्रकरण की परतें ही खोल दी हैं। वीडियो में जो तस्वीर सामने आई, वह यह बताने के लिए काफी है कि सरकारी आदेश कागजों तक सीमित रह जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर फैसले अलग ही दिशा में चलते नजर आते हैं।
जब आम आदमी जमीन विवाद में पुलिस के चक्कर काटता है, तो उसे अक्सर “राजस्व का मामला” बताकर टाल दिया जाता है। लेकिन जब कोई मामला अधिकारियों के दिल को छू जाता है तो वही अधिकारी सक्रिय होकर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने लगते है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह मुस्तैदी सभी के लिए समान रूप से लागू होगी या फिर यह सुविधा चुनिंदा मामलों तक ही सीमित रहेगी?
सरकार की मंशा साफ है—व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना और विभागों की जिम्मेदारी तय करना। लेकिन अगर सिस्टम के भीतर ही आदेशों की अनदेखी होने लगे, तो फिर आम जनता किस पर भरोसा करे?
फिलहाल यह मामला केवल एक उदाहरण नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए आईना बनकर सामने आया है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या वाकई जमीन से जुड़े मामलों में तय नियमों का पालन सुनिश्चित हो पाता है या नहीं।

