अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की घेराबंदी शुरू कर दी है, जिससे होर्मुज जलमार्ग पर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ब्रिटेन के मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, इस कार्रवाई से अरब सागर और ओमान की खाड़ी का क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके जवाब में ईरान ने भी पलटवार की धमकी देते हुए कहा है कि वह अपनी सीमाओं और हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा।
ट्रंप की सख्त चेतावनी: “आसपास आए पोत तो कर देंगे खत्म”
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि ईरानी नौसेना का कोई भी युद्धपोत नाकेबंदी के आसपास दिखाई देता है, तो अमेरिकी सेना उसे तुरंत नष्ट कर देगी। अमेरिका का दावा है कि उसने पहले ही ईरान के कई युद्धपोत खत्म कर दिए हैं और समुद्र के रास्ते होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक असर
होर्मुज जलमार्ग की नाकेबंदी का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 104.24 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल का मूल्य भी 102.29 डॉलर हो गया है। इस तनाव का असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी दिखा, जहां सेंसेक्स 703 अंक और निफ्टी 208 अंक लुढ़ककर बंद हुए।
ईरान का रुख और वैश्विक चिंता
ईरान ने अमेरिका की इस नाकेबंदी को ‘गैरकानूनी’ करार दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने स्पष्ट किया है कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा और दुश्मन के पोतों को अपने क्षेत्र से नहीं गुजरने देगा। वहीं, दूसरी ओर दुनिया भर के देशों ने शांति की अपील की है। चीन और रूस इस मुद्दे पर चर्चा करने वाले हैं, जबकि आसियान देशों और ऑस्ट्रेलिया ने समुद्र मार्ग को सभी के लिए खुला रखने और पश्चिम एशिया में शांति बहाली की मांग की है।
पोतों की आवाजाही में भारी कमी
लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध विराम के बाद इस रास्ते से रोजाना औसतन 40 पोत गुजर रहे थे, लेकिन तनाव बढ़ने के कारण सोमवार को यह संख्या घटकर केवल 34 रह गई है। अमेरिका ने ईरान के करीब 18 बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है, जिससे समुद्री व्यापार पर गहरा संकट मंडरा रहा है।

