उत्तराखंड देवभूमि तो है ही वीर भूमि भी है। यहां का का ऐसा कोई परिवार नहीं जिसका कोई सदस्य किसी न किसी रूप में सेना से न जुड़ा हो। मतलब हर परिवार का भारतीय सेना से ताल्लुक है. वीर भूमि को देखते हुए चार धामों की धरती उत्तराखंड में सैन्यधाम भी बनकर तैयार है। भाजपा सरकार ने सैन्यधाम बनाने का जनता से वादा किया था जो पूरा हो गया है।
लेकिन अभी तक सैन्यधाम जनता को समर्पित नहीं हुआ है.। राज्य के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी की माने तो इस सैन्य धाम में राज्य के हर उस सैनिक के घर आंगन की पावन मिट्टी को लाया गया है जिसने भारत मां के वैभव की हिफाजत के लिए खुद को फ़ना कर दिया। सरहद की हिफाजत के लिए कर्तव्य की बलिवेदी पर खुद को हंसते हंसते न्यौछावर कर दिया । उत्तराखंड में सैन्यधाम तैयार है लेकिन जनता को अभी तक समर्पित नहीं किया गया। जिसको लेकर सियासत तेज हो गई है।
दरअसल भाजपा चाहती है कि पीएम मोदी जनता को सैन्यधाम समर्पित करें। राज्य के उद्यान, कृषि और सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी की माने तो पीएम मोदी ने इसके लिए हामी भी भरी है और जल्द ही कोई तारीख तय कर ली जाएगी। हालांकि मीडिया ने जब जोशी से सवाल किया कि तैयार सैन्यधाम के लोकार्पण पर इतनी देरी क्यों तो जोशी ने तपाक से कहा राजनीति में हैं हम को साधु संत नहीं! ..हम इसका लाभ निश्चित रूप से लेना चाहेंगे।
बस अब बात निकली थी तो दूर तलक जानी ही थी, कांग्रेस ने गणेश जोशी के इस बयान को पकड़ लिया और उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा महार दसौनी ने एक बयान जारी करते हुए आरोप लगाया कि, भाजपा शहादत को भी राजनैतिक लाभ की कसौटी पर परख रही है। गरिमा दसौनी ने कहा सैन्यधाम के उद्घाटन से चुनावी लाभ लेने की बात बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने गणेश जोशी पर सीधा हमला करते हुए कहा जो रणछोड़ दास हो और पीठ दिखाकर लौटा वो वो शहादत का मोल नहीं जान सकता। दसौनी ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। बहरहाल उत्तराखंड के लिए बेहद संजीदा मसले को लेकर सियासत तेज हो गई है..देखना ये है कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी का बयान भाजपा के लिए फायदे का सौदा होता है या नुकसान का। हालांकि कांग्रेस के हाथ मुद्दा लगा है।

