Uttarakhand: ‘गंगा किनारे खुले में न फेंका जाए कचरा’,हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुझाया NGT का रास्ता

ख़बर शेयर करें

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा नदी के किनारे खुले स्थानों में कचरा डंप करने से हो रहे नुकसान के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को इस विषय में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल जाने के निर्देश दिए हैं।

यह भी पढ़ें -  Mussoorie: IAS अफसरों को उपराष्ट्रपति का गुरुमंत्र; बोले-'सेवाभाव और कर्तव्यबोध' को बनाएं अपनी ताकत

नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया था कि हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा किनारे बने होटलों, खनन कार्यों और खुले में कचरा फेंकने से गंगा और उसकी सहायक नदियों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इससे क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की थी कि गंगा किनारे संचालित होटलों और रिसॉर्ट्स की सख्त निगरानी के लिए एक हाई पावर कमेटी बनाई जाए। साथ ही खुले में कूड़ा डंप करने पर तत्काल रोक लगाने के कड़े निर्देश जारी किए जाएं।

यह भी पढ़ें -  Dehradun कैनाल रोड पर अनियंत्रित कार ने मारी टक्कर, 26 वर्षीय युवती की मौत, 2 गिरफ्तार

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता आदित्य प्रताप सिंह ने पीठ को बताया कि गंगा संरक्षण से जुड़ा ऐसा ही एक मामला NGT में पहले से ही लंबित है, जिस पर अक्टूबर में सुनवाई होनी है।

यह भी पढ़ें -  Nainital: माल रोड में दरारें और धंसती पहाड़ियां! आबादी और गाड़ियों के बोझ से चरमराई सरोवर नगरी

अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि एनजीटी ने इस मामले में प्रदेश सरकार से गंगा संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों पर जवाब मांगा है। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को एनजीटी में चल रही कार्रवाई में हस्तक्षेप करने के निर्देश देते हुए जनहित याचिका को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad