क्या आप हाथी पर सवार होकर जंगल की सैर करना चाहते हो तो हरिद्वार के राजाजी नेशनल पार्क के चीला रेंज में पधारिए। यहां आप पार्क प्रशासन की तय फीस चुकाइए और हाथी सफारी का मजा लीजिए। चीला रेंज में हाथी सफारी पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रही है।
इस सफारी से जहां सैलानी सैर सपाटे का मजा ले रहे हैं वहीं पार्क प्रशासन की आमदनी में भी इजाफा हुआ है। मतलब साफ है कि चीला रेंज में पार्क प्रशासन के हाथी पार्क के लिए कमाऊ पूत से कम नहीं हैं। बताया जा रहा है कि 2026 के पर्यटन सत्र में हाथी सफारी से पार्क प्रबंधन को 4915912 रुपये की कमाई हुई है। पार्क प्रशासन भारतीय पर्यटकों से 1000 रुपये और विदेशी पर्यटक से 2500 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क लेता है।
राजाजी नेशनल पार्क के आंकड़ों के मुताबिक इस बार कुल 18,910 पर्यटकों ने हाथी सफारी का आनंद लिया। जिसमें 17804 भारतीय पर्यटक शामिल रहे, जबकि 1106 विदेशी सैलानियों ने भी हाथी सफारी का रोमांचक मजा लिया। देशी-विदेशी सैलानियों की हाथी सफारी में बढ़ती दिलचस्पी साफ जाहिर कर रही है कि राजाजी की हाथी सफारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है।
राजाजी पार्क की चीला रेंज में साल के जंगलों के बीच हाथी पर सवार होकर जंगली जानवरों को निहारना सैलानियों को बेहद रास आ रहा है।साल 2017 से शुरू की गई हाथी सफारी बीच में तकनीकी वजहो के चलते कुछ समय के लिए बंद हुई थी लेकिन जब खुली तो चीला रेंज आने वाले सैलानियों ने हाथी सफारी को सिर आंख पर बिठा लिया।
दरअसल हाथी सफारी के दौरान पर्यटक चीला रेंज के घने जंगलों में जंगली हाथी, चीतल, सांभर, घड़ियाल और सैकड़ों प्रजाति के पक्षियों को नजदीक से देख पाते हैं। जीप सफारी के मुकाबले हाथी सफारी में जानवरों के ज्यादा करीब पहुंचा जा सकता है।
आपको बता दें कि चीला रेंज में एक बार में चार पर्यटक एक हाथी पर बैठकर करीब एक घंटे की सफारी करते हैं।
यहां सुबह और शाम की दो पालियों में हाथी सफारी चलाई जाती है। हाथी सफारी से हुई आमदनी को पार्क प्रशासन हाथियों के रखरखाव और वन्यजीव संरक्षण में करता है। माना जा रहा है कि हाथी सफार में सैलानियों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए राजाजी पार्क प्रशासन हाथी सफारी के टिकट को ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम भी बना सकता है। ताकि अधिक से अधिक सैलानी हाथियों की सवारी का मजा लेने चीला रेंज का रुख कर सकें।

