आयुष्मान योजना में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, चार अस्पतालों पर गिरी SHA की गाज

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सरकार जनता को राहत देने के लिए योजना बनाती है लेकिन तिकड़मबाज उन योजनाओं की झोली से अपने लिए मुनाफे के छेद बना बैठते हैं। जिसका सीधा असर ये होता है कि आम आदमी जिसके लिए योजना बनी थी उसका फायदा नही मिलता जबकि सराकर के दामन पर बदनामी के दाग लग जाते हैं।

हालांकि सरकार की पैनी निगरानी जारी रही तो तिकड़मबाजों पर नकेल कसने में वक्त भी नहीं लगता। बहरहाल आयुष्मानभारत योजना में गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों पर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (SHA) ने सख्त एक्शन लेते हुए उन्हें पैनेल से तत्काल बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

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SHA की गाज की जद में बरेली का एक और देहरादून के तीन अस्पताल आए हैं । इन चारों अस्पतालों पर कैशलेस इलाज से इनकार, मरीजों से अवैध वसूली और अनावश्यक भर्ती जैसे गंभीर आरोप हैं। ऐसे में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने चारों अस्पतालों को आयुष्मान पैनल से तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। जबकि सभी को सात से पंद्रह दिन के भीतर लगे आरोपों पर अपना पक्ष रखने को कहा है।बताया जा रहा है कि अगर जवाब संतोषजनक नही लगे तो SHA चारों अस्पतालों को आयुष्मान के पैनल से हमेशा के लिए हटा सकता है।

दरसल प्राधिकरण की विजिलेंस, मेडिकल और क्वालिटी टीम ने शिकायत मिलने पर अस्पतालों का ऑडिट किया था। जिसमें प्राधिकरण को प्रथमदृष्ट्या कई गडबड़ियां मिली।पता चला कि आयुष्मान पैनल में होने के बावजूद अस्पताल आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को कैशलेस इलाज देने मना करते थे।

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इतना ही नहीं आरोप हैं कि मरीजों से इलाज के नाम पर मोटी फीस वसूली जाती थी। प्राधिकरण को पड़ताल के दौरान पता चला कि अस्पताल जरूरत न होने पर भी मरीजों को भर्ती कर क्लेम ले रहे थे। बहरहाल राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सभी चार अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिसमें आरोपों पर बिंदुवार जवाब मांगा गया है। जिसके तहत एक पखवाड़े के भीतर आरोपी अस्पतालों को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को जवाब देना होगा।

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माना जा रहा है कि अगर अस्पताल अपना पक्ष सही साबित नहीं कर पाए तो इन्हें आयुष्मान योजना के पैनल से स्थायी रूप से डि-लिस्ट कर दिया जाएगा। साथ ही अब तक लिए गए गलत क्लेम की वसूली भी की जाएगा। वहीं प्राधिकरण ने मरीजों से अपील की है कि अगर कोई सूचीबद्ध अस्पताल आयुष्मान कार्ड पर इलाज से मना करे या पैसे मांगे तो तुरंत टोल फ्री नंबर 155368 या 14555 पर शिकायत करें। ताकि अस्पतालों की मनमानियों पर रोक लग सके।

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