हरिद्वार। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज मेला नियंत्रण सभागार, हरिद्वार में राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के समग्र विकास, प्रशासनिक सुधारों और युवाओं के हित में 10 बड़े और जनहितकारी प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।
कैबिनेट बैठक का सबसे प्रमुख फैसला युवाओं के रोजगार से जुड़ा है। राज्य की समूह ‘ग’ के सीधी भर्ती वाले वर्दीधारी पदों पर सेवामुक्त अग्निवीरों के सेवायोजन के लिए ‘क्षैतिज आरक्षण नियमावली, 2026’ को मंजूरी दे दी गई है। केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार इस नियमावली में अग्निवीरों को लिखित परीक्षा और शारीरिक मानक परीक्षा में विशेष छूट प्रदान की जाएगी।
प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘द्वितीय उत्तराखंड जन विश्वास संशोधन विधेयक, 2026’ को विधानसभा में लाने की मंजूरी दी गई। इसके तहत छोटे तकनीकी और प्रक्रियात्मक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर नागरिक दंड का प्रावधान किया जाएगा।
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और भूमि उपयोग को विनियमित करने के लिए ‘उत्तराखंड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली, 2026’ को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही, प्रदेश की पंचम विधानसभा के वर्ष 2026 के तृतीय सत्र को आहूत करने की मंजूरी दी गई, जिसकी तिथि और स्थान तय करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है।
आपदा और सुरक्षा प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए केंद्र के मॉडल फायर सर्विस बिल, 2019 के अनुरूप ‘उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026’ को विधानसभा में प्रस्तुत करने की स्वीकृति मिली। ग्रामीण विकास के तहत स्वजल और राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के 215 पदों की निरंतरता को 28 फरवरी 2027 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
हरिद्वार की भगवानपुर तहसील स्थित ग्राम सिसौना में किफायती आवासीय परियोजना के पहुंच मार्ग की चौड़ाई में 3 मीटर की शिथिलता दी गई है। वहीं, ऊधमसिंह नगर की बाजपुर तहसील में भू-उपयोग परिवर्तन से संबंधित शासनादेश में दर्ज खसरा संख्या की लिपकीय त्रुटि को सुधारा गया है।
साहसी और वीर बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार योजना’ को मंजूरी दी गई। इसके अलावा, हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के सर्वांगीण विकास हेतु नई सोसायटी के गठन को सैद्धांतिक अनुमोदन प्रदान किया गया, जिसे योग, आयुर्वेद और प्राच्य अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

