देहरादून। राजधानी देहरादून की सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए शासन द्वारा तय की गई 15 अक्टूबर की डेडलाइन समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद राजधानी की मुख्य सड़कों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सड़कें बदहाल पड़ी हैं। बिजली और पीएनजी की भूमिगत लाइनें बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों की अधूरी मरम्मत के कारण शहरवासी धूल और गड्ढों से बेहाल हैं।
शहर के प्रमुख इलाकों में पाइपलाइन और केबल बिछाने के लिए खुदाई तो कर दी गई, लेकिन इसके बाद सड़कों का डामरीकरण नहीं हुआ। रायपुर थाने से लाडपुर तिराहे तक रायपुर रोड की हालत बेहद खराब है। इसके अलावा नेहरू कॉलोनी, सुभाष रोड, सीएमआई तिराहा से आराघर चौक और फव्वारा चौक से छह नंबर पुलिया मार्ग पर पैचवर्क का काम अब तक अधूरा पड़ा है।
सड़कों पर बने गहरे गड्ढों के कारण रोजाना हादसों का खतरा बना रहता है। वहीं, सड़कों से लगातार उड़ रही धूल के कारण स्थानीय निवासियों और दुकानदारों का जीना दुश्वार हो गया है। इस स्थिति का असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है और वे सांस संबंधी समस्याओं से परेशान हो रहे हैं।
दूसरी ओर, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के आंकड़े जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहे हैं। प्रांतीय खंड लोनिवि के अधिशासी अभियंता दीपक कुमार का दावा है कि 190 किलोमीटर में से 178 किलोमीटर यानी 94% सड़कें गड्ढामुक्त कर दी गई हैं। वहीं निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता नीरज त्रिपाठी के मुताबिक उनके डिवीजन में 81 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
अधिकारियों के इन दावों पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उत्तराखंड पहाड़ी महासभा की महासचिव गीता बिष्ट ने आर्केडिया वार्ड नंबर 92 की सड़कों की बदहाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि एक महीना बीत जाने के बाद भी मोहनपुर-स्मिथनगर मार्ग, स्मिथनगर गडरिया मोहल्ला, ठाकुरपुर और श्यामपुर के राणा चौक की सड़कों की मरम्मत नहीं हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में तो गड्ढे भरने का अभियान तक ठीक से शुरू नहीं हो सका है। मीठीबेरी मार्ग पर चौड़ीकरण के नाम पर केवल मिट्टी डाल दी गई है, जिससे आवाजाही और मुश्किल हो गई है। उत्तराखंड पहाड़ी महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़कों का डामरीकरण शुरू नहीं हुआ, तो वे लोनिवि मुख्यालय का घेराव करेंगे।

