नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के प्राथमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापकों के 451 रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। अदालत के इस फैसले से साल 2021 से नियुक्ति का इंतजार कर रहे सैकड़ों योग्य अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
यह पूरा विवाद वर्ष 2019-20 में शुरू हुआ था, जब उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने प्राथमिक शिक्षा में 2287 सहायक अध्यापक पदों के लिए भर्ती विज्ञप्ति जारी की थी। इस मामले को लेकर सूरज गैरोला, मनोज पांडे और अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए बताया कि कोरोना महामारी के दौरान सी-टीईटी परीक्षा का आयोजन समय पर नहीं हो सका था। इस देरी की वजह से डीएलएड परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद कई अभ्यर्थी आवेदन की पात्रता से बाहर हो गए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रभावित अभ्यर्थियों को विशेष छूट देने का आदेश दिया था। इसके बाद तात्कालीन शिक्षा सचिव ने 20 सितंबर 2021 को अदालत में लिखित अंडरटेकिंग देकर अभ्यर्थियों को छूट देने का भरोसा दिया था।
शिक्षा सचिव के आश्वासन के बाद विभाग ने 451 अतिरिक्त पदों को चिह्नित किया और 11 अक्टूबर 2021 को इनके लिए नई विज्ञप्ति भी जारी कर दी। हालांकि, विज्ञप्ति जारी होने के लंबे समय बाद भी इन पदों पर अंतिम नियुक्तियां नहीं की गई थीं।
अदालत ने अब इस लंबी देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए शिक्षा विभाग को सभी 451 पदों पर भर्ती प्रक्रिया बिना किसी देरी के शीघ्र पूरा करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद अब राज्य में प्राथमिक शिक्षकों के खाली पदों पर नियुक्ति का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

