देहरादून: MBBS दाखिले में फर्जी प्रमाण पत्र का एक और केस दर्ज, जांच की मांग तेज

ख़बर शेयर करें

देहरादून। राजधानी देहरादून में एमबीबीएस दाखिले के लिए सरकार के ई-पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज लगाकर स्थाई निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने का एक और गंभीर मामला सामने आया है। देहरादून के बसंत विहार थाने में राजस्व निरीक्षक कांवली स्वाति की तहरीर पर बुधवार को इस संबंध में नया मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

यह पूरा मामला परम विहार, कांवली के पते से जुड़ा हुआ है, जहां एलिस तोमर पुत्र अमित तोमर ने पोर्टल पर स्थाई निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। जांच के दौरान उनके आवेदन के साथ लगाए गए आधार कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र पूरी तरह से फर्जी पाए गए हैं।

इसके बाद जब राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया, तो आवेदन में दिए गए पते पर कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं मिला। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और फर्जी दस्तावेजों के जरिए मेडिकल सीटों पर कब्जा करने के खेल का एक और बड़ा पर्दाफाश हुआ है।

यह भी पढ़ें -  देहरादून साइंस सिटी के लिए केंद्र की हरी झंडी: ₹39 करोड़ की गैप फंडिंग तय, केंद्र देगा ₹14 करोड़

इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई भी तेज हो गई है, जिसमें सीओ सदर अंकित कंडारी ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल तीन मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इन मुकदमों के आधार पर पुलिस अभी तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जबकि इस नए मामले की जांच भी अब जिले की SIT द्वारा की जाएगी।

इस बीच, इस पूरे फर्जीवाड़े पर राज्य की राजनीति भी गर्मा गई है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने उत्तराखंड में हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित नीट-यूजी काउंसलिंग में आरक्षित सीटों के आवंटन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि इस पूरे सीट घोटाले की एक स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।

यह भी पढ़ें -  देहरादून में रोजगार मेले का कमाल: 200 से अधिक युवाओं का चयन, दुबई में भी मिली नौकरी

उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि सामान्य और ओबीसी वर्ग के कई अयोग्य अभ्यर्थियों को नियमों को ताक पर रखकर एससी श्रेणी की सीटें आवंटित कर दी गई हैं। उनके अनुसार, यह कृत्य राज्य के वास्तविक और पात्र युवाओं के अधिकारों पर सीधा डाका डालने जैसा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस पूरे प्रकरण में अब तक किन-किन अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ क्या विधिक कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि इस तरह की अनियमितताएं पिछले वर्षों में भी हुई हैं, तो पिछली काउंसलिंग के रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें -  'युवाओं की हुंकार से बेनकाब हुई झूठ की गूंज'- छात्रसंघ चुनाव पर बोले सीएम धामी

यशपाल आर्य ने पुरजोर मांग की है कि राउंड-1 और राउंड-2 में आरक्षित तथा डोमिसाइल सीटों पर चयनित सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का भौतिक व डिजिटल सत्यापन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, सभी संदिग्ध जाति और स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की शत-प्रतिशत जांच पूरी होने से पहले अगली काउंसलिंग प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।