देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दून अस्पताल और धर्मपुर स्थित एक कोचिंग संस्थान में बच्चों के साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। दोनों घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर जोरदार हंगामा किया।
पहला मामला दून अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग का है, जहां रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे लिफ्ट में 12 साल के बच्चे से अभद्रता का आरोप लगा है। पीड़ित बालक मेडिसिन विभाग में भर्ती अपने मरीज के लिए पानी लेने गया था। आरोप है कि उपनल के एक सफाई कर्मी ने लिफ्ट में उसके साथ अनुचित हरकत की, जिसके बाद परिजनों ने आरोपी कर्मचारी को हटाने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।
अस्पताल में बढ़ते बवाल को देखते हुए दून अस्पताल की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने मामले को अत्यंत गंभीर माना है। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक से तत्काल जांच रिपोर्ट तलब की है और रिपोर्ट के आधार पर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
दूसरी ओर, आरोपी कर्मचारी के सहकर्मियों का दावा है कि वह लंबे समय से कार्यरत और शांत स्वभाव का व्यक्ति है। उनका कहना है कि वह बच्चे से सिर्फ मजाक कर रहा था और यह पूरा मामला गलतफहमी का हो सकता है। हालांकि, दून अस्पताल परिसर में सुरक्षा चूक और अनुचित व्यवहार का यह हाल के दिनों में पांचवां मामला है, जिससे अस्पताल के निगरानी तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी घटना धर्मपुर क्षेत्र के एक नामी कोचिंग सेंटर की है, जहां संचालक पर छात्रा से अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। शनिवार से वायरल हो रहे एक वीडियो और ऑडियो में पीड़ित छात्रा के परिजन कोचिंग सेंटर पहुंचकर संचालक को खरी-खोटी सुनाते और कड़े सवाल-जवाब करते नजर आ रहे हैं।
वीडियो में कोचिंग संचालक पर छात्रा से आपत्तिजनक बातें करने और अनुचित दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है। परिजनों के विरोध के सामने संचालक हाथ जोड़कर माफी मांगता दिख रहा है, वहीं छात्रा के पिता अपनी बेटी का दाखिला तुरंत रद्द करने की बात कह रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में अभी तक पुलिस में कोई लिखित तहरीर या शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
बहरहाल, बड़ा सवाल यह है कि बच्चों के साथ बढ़ती अभद्रता और अपराधों से उन्हें आखिर सुरक्षा कब मिलेगी। राज्य की धामी सरकार ने अपराध पर लगाम लगाने के लिए सख्त कानून बनाए हैं और समय-समय पर होने वाली कार्रवाई से इन कानूनों की प्रभावशीलता भी सामने आती रही है। लेकिन बावजूद इसके लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं कानून व्यवस्था के समक्ष गंभीर चुनौती खड़ी कर रही हैं। साथ ही, ये घटनाएं बाल सुरक्षा को लेकर भी कई बड़े सवाल खड़े करती हैं।

