देहरादून। की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत (पॉक्सो) की न्यायाधीश मंजू सिंह मुंडे की कोर्ट ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने और अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल करने के आरोपी राहुल चौहान को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आपसी सहमति से संबंध बनाए गए हों और बाद में रिश्ता टूट जाए, तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट या जबरन संबंध बनाने की पुष्टि नहीं हुई। इसके अलावा, फॉरेंसिक साक्ष्यों का न होना और वैज्ञानिक सबूतों की कमी भी आरोपी के दोषमुक्त होने का मुख्य आधार बनी।
मामले की जानकारी देते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता आशुतोष गुलाटी ने बताया कि थाना पटेलनगर में पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पड़ोसी राहुल चौहान ने वर्ष 2020 में शादी का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध बनाए और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो बनाकर सगाई तोड़ने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया।
पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर वर्ष 2023 में अदालत में चार्जशीट पेश की थी। सुनवाई के दौरान साक्ष्यों का अध्ययन करने पर कोर्ट ने पाया कि वर्ष 2020 से 2021 के बीच दोनों के संबंध पूरी तरह आपसी सहमति से बने थे। बाद में आरोपी के किसी अन्य युवती के संपर्क में आने पर पीड़िता ने खुद ही यह रिश्ता खत्म कर लिया था।
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता के पति की ओर से एक पेनड्राइव अदालत में सौंपी गई थी, जिसमें कपड़े बदलने का आपत्तिजनक वीडियो होने का दावा किया गया था। हालांकि, पुलिस जांच में यह साबित नहीं हो सका कि यह वीडियो कब और किस मोबाइल से बनाया गया था, और न ही इस पेनड्राइव की कोई फॉरेंसिक जांच कराई गई थी।
पुलिस आरोपी के जब्त किए गए मोबाइल से भी कोई आपत्तिजनक सामग्री या वीडियो बरामद नहीं कर सकी। इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के अभाव के कारण अभियोजन का पक्ष कमजोर पड़ गया। इन सभी कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर गौर करने के बाद अदालत ने आरोपी राहुल चौहान को बाइज्जत बरी करने का फैसला सुनाया।

