देहरादून। देहरादून में साइबर ठगों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है, जहां ताजा मामलों में अपराधियों ने पांच अलग-अलग लोगों के बैंक खातों से कुल 7.97 लाख रुपये उड़ा लिए हैं। खास बात यह है कि इनमें कई मामले ऐसे हैं जिनमें पीड़ितों की ओर से किसी भी व्यक्ति के साथ कोई OTP साझा नहीं किया गया था। लगातार सामने आ रही ऑनलाइन ठगी की इन वारदातों के बाद स्थानीय थानों की पुलिस ने विभिन्न धाराओं में प्राथमिकियां दर्ज कर अपनी गहन जांच शुरू कर दी है।
घटनाओं के सिलसिलेवार विवरण के अनुसार, माजरा निवासी रमेश चंद्र पुंडीर के बैंक खाते से तीन अक्टूबर को अचानक 3.45 लाख रुपये की बड़ी रकम निकाल ली गई। उन्होंने पटेलनगर कोतवाली पुलिस को दी गई शिकायत में स्पष्ट किया कि उन्होंने ऑनलाइन लेनदेन के लिए किसी को भी अपना ओटीपी नहीं बताया था। इसी तरह टर्नर रोड स्थित आसीमा विहार निवासी संजय मल्ल के खाते से भी साइबर अपराधियों ने 1.43 लाख रुपये साफ कर दिए।
इसके अलावा जोगीवाला निवासी शंकुतला रावत ने पुलिस को शिकायत देकर बताया कि 16 सितंबर को उनके फोन का दुरुपयोग करते हुए भारतीय स्टेट बैंक के खाते से अलग-अलग किस्तों में 98 हजार रुपये निकाल लिए गए। वहीं रायपुर की विष्णुलोक कॉलोनी निवासी निशांत के खाते से 1.20 लाख रुपये की अनधिकृत निकासी हुई। राजीव नगर निवासी जमशेद अंसारी के पंजाब नेशनल बैंक खाते से 12 सितंबर को 91 हजार रुपये निकाले जाने का मामला सामने आया है, जहां यह रकम बलजीत कौर के खाते में ट्रांसफर हुई थी।
एक अन्य सनसनीखेज मामले में सेलाकुई थाना क्षेत्र के एक युवक के बैंक खाते से साइबर ठगों ने 1.69 लाख रुपये की नकदी गायब कर दी। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और बीएनएस की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी शैंकी कुमार ने बताया कि मूल रूप से चमोली जिले के लुणतरा नंदनगर निवासी और वर्तमान में सेलाकुई में रहने वाले पीड़ित ने पांच अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराई थी।
पीड़ित युवक ने बताया कि उनके एसबीआई खाते से पांच अक्टूबर को पहले 10 हजार, 40 हजार और 20 हजार रुपये निकाले गए तथा इसके बाद सात अक्टूबर को 99 हजार रुपये की निकासी की गई। ये सभी लेनदेन यूपीआई के जरिए किए गए थे, जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने न तो कोई लेनदेन किया और न ही किसी को इसकी अनुमति दी थी। उन्हें आशंका है कि ठगों ने उनके गूगल पे या मोबाइल की डिजिटल सुरक्षा में सेंध लगाकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। फिलहाल पुलिस सभी मामलों में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर खातों की ट्रेल खंगालने में जुटी हुई है।

