देहरादून। उत्तराखंड राज्य गठन के 25 सालों के इतिहास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सबसे ज्यादा घोषणाएं करने और उन्हें धरातल पर उतारने का नया रिकॉर्ड कायम किया है। देहरादून, बागेश्वर बाल विज्ञान महोत्सव और हल्द्वानी के व्यापारी सम्मेलन में हुई 11 नई घोषणाओं के साथ ही सीएम धामी की कुल घोषणाओं का आंकड़ा 4,621 के पार चला गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री धामी अब तक अपनी 62 फीसदी घोषणाओं को पूरा करवा चुके हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी न सिर्फ घोषणाएं करने में अव्वल रहे हैं, बल्कि उन पर एक्शन लेने की रफ्तार में भी आगे हैं। उनकी कुल 4,621 घोषणाओं में से 2,852 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1,397 घोषणाओं पर काम अंतिम चरण में चल रहा है। इस तरह देखें तो उनका कुल डिलीवरी रेट 90 प्रतिशत के करीब पहुंच रहा है।
फिलहाल मुख्यमंत्री की घोषणाओं में से केवल 303 योजनाएं ही लंबित हैं। इन बचे हुए कामों को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द पूरा कराने के लिए मुख्य सचिव को विशेष रूप से मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यदि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों के ट्रैक रिकॉर्ड की तुलना करें तो 100% स्ट्राइक रेट के साथ दिवंगत मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी सबसे आगे रहे हैं। उन्होंने 11 सितंबर 2011 से 13 मार्च 2012 के अपने दूसरे कार्यकाल में कुल 33 घोषणाएं की थीं और सभी 33 पूरी हुईं। वहीं, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 2,406 घोषणाएं की थीं, जिनमें से 2,063 पूरी हुईं और उनका स्ट्राइक रेट 85.74 प्रतिशत रहा।
विपक्ष यानी कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों में हरीश रावत का प्रदर्शन सबसे बेहतर दर्ज किया गया है। साल 2014 में सत्ता संभालने वाले हरीश रावत ने 3,814 घोषणाएं की थीं, जिनमें से 2,201 (57.71%) पूरी हुईं। उनसे पहले विजय बहुगुणा ने 1,348 में से 680 (50.45%) और वर्ष 2002 में राज्य के पहले निर्वाचित सीएम एनडी तिवारी ने 895 में से केवल 311 (34.75%) घोषणाएं ही पूरी की थीं।
राज्य के अन्य मुख्यमंत्रियों में नित्यानंद स्वामी ने 33 और भगत सिंह कोश्यारी ने 11 घोषणाएं की थीं। पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक के समय 1,140 में से 450 (39.47%) घोषणाएं पूरी हुईं, जबकि तीरथ सिंह रावत के छोटे कार्यकाल में 183 में से 90 (49.18%) घोषणाओं पर काम पूरा हो सका।
अपनी सरकार की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भाजपा सरकार सिर्फ बातें करने में नहीं बल्कि काम में यकीन रखती है। जिन योजनाओं का शिलान्यास किया जाता है, उनका लोकार्पण भी सरकार ही करती है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश के दशकों से अटके विकास काम अब तेजी से पूरे किए जा रहे हैं।

