देहरादून। उत्तराखंड के सीमांत इलाकों के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं भी आसानी से NCC ले सकेंगे। राज्य सरकार एनसीसी की नई यूनिट्स के विस्तार को लेकर केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय को जल्द ही एक विस्तृत प्रस्ताव भेजने जा रही है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत तिब्बत और नेपाल सीमा से सटे पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
तिब्बत और नेपाल की सीमाओं से सटे संवेदनशील पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी के विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर एनसीसी विंग से सीधे जोड़ा जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ को भी एनसीसी के इस विस्तार अभियान से जोड़ा जा रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों के छात्रों को स्कूल स्तर से ही अनुशासित राष्ट्रसेवा की भावना से जोड़ना है।
इस संबंध में राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मुताबिक, सीमावर्ती विद्यालयों में एनसीसी शुरू होने से न केवल छात्रों का सर्वांगीण और मानसिक विकास होगा, बल्कि भविष्य में सेना, नौसेना, वायुसेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए भी उन्हें प्राथमिकता और बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे। शिक्षा मंत्री के निर्देशों के बाद विभाग ने प्रशासनिक धरातल पर योजना का प्रस्ताव तैयार करने का काम तेज कर दिया है।
इतना ही नहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने समग्र शिक्षा के तहत प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की आयोजित बैठक में भी वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में एनसीसी विस्तार को शामिल किया है। बोर्ड की ओर से यह महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया गया है कि माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों यानी ड्रॉप आउट दर को कम करने और सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से विद्यालयों को एनसीसी से जोड़ना बेहद कारगर साबित होगा।
वर्तमान में प्रदेश में संचालित एनसीसी की स्थिति की बात करें तो उत्तराखंड के कुल 536 स्कूलों में अभी एनसीसी की इकाइयां सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं। इनमें राज्य के 296 हाईस्कूल और 240 इंटरमीडिएट कॉलेज शामिल हैं, जहां छात्रों को एनसीसी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
स्कूलों के अलावा प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, डिग्री कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और आईटीआई (ITI) में भी छात्रों को एनसीसी लेने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, उत्तराखंड की भौगोलिक विषमताओं, दुर्गम पहाड़ियों और अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती महत्व को देखते हुए यह मौजूदा संख्या काफी कम मानी जा रही है, जिस वजह से इसे व्यापक स्तर पर बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
राज्य सरकार की इस विशेष योजना के तहत रक्षा मंत्रालय को जल्द ही आधिकारिक प्रस्ताव औपचारिक रूप से भेजा जाएगा। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में अभी पच्चीस हजार से अधिक छात्र-छात्राएं एनसीसी कैडेट्स के रूप में जुड़े हुए हैं। सीमांत जिलों में इस नई विस्तार योजना के लागू होने के बाद एनसीसी कैडेट्स की इस कुल संख्या में और अधिक भारी बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

