चमोली। आपदा और विपदा की घड़ी में सरकार की संवेदनशीलता का असली इम्तिहान होता है। सामान्य परिस्थितियों में दफ्तरों में बैठकर निर्देश देना आसान है, लेकिन जब किसी हादसे की खबर अचानक सामने आए और लोगों की जिंदगी दांव पर लगी हो, तब शासन की तत्परता और नेतृत्व की सक्रियता मायने रखती है।
चमोली में टनल हादसे की सूचना सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सक्रिय होना इसी संवेदनशीलता की तस्वीर पेश करता है। टनल हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल अलर्ट किया और राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। घटना की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजने के साथ ही प्रभारी मंत्री को भी घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री की ओर से स्पष्ट संदेश था कि हादसे में फंसे लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और राहत-बचाव अभियान में संसाधनों की कोई कमी न रहने पाए। घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने पूरे मामले को केवल अधिकारियों के भरोसे छोड़ने के बजाय खुद लगातार अपडेट लिया।
सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही अधिकारियों से घटनाक्रम की जानकारी लेने और राहत-बचाव अभियान की प्रगति की समीक्षा करने के बाद मुख्यमंत्री का सीधे मौके की ओर रवाना होना यह बताता है कि आपदा की घड़ी में नेतृत्व किस तरह जमीन पर दिखाई देना चाहिए। दरअसल, उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में आपदाएं कोई नई बात नहीं हैं।

भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां सड़क हादसे, भूस्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटना और अन्य प्राकृतिक घटनाएं समय-समय पर चुनौती बनती रही हैं। ऐसे में सरकार की तैयारी और मुख्यमंत्री की सक्रियता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी भी हादसे के बाद सबसे पहले सवाल उठता है कि राहत और बचाव कितनी तेजी से शुरू हुआ, प्रभावित लोगों तक मदद कितनी जल्दी पहुंची और प्रशासन ने स्थिति को संभालने में कितनी तत्परता दिखाई।
चमोली टनल हादसे के मामले में मुख्यमंत्री धामी ने घटना की गंभीरता को शुरुआत से ही समझते हुए अधिकारियों को सक्रिय किया। यही वजह है कि घटना की सूचना के बाद प्रशासनिक मशीनरी को तेजी से मौके पर लगाया गया। राहत-बचाव से जुड़े विभागों और अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया, ताकि अभियान में किसी तरह की देरी न हो।

मुख्यमंत्री की कार्यशैली में एक बात लगातार दिखाई देती है—आपदा के समय देहरादून से निर्देश देने के बजाय घटनास्थल तक पहुंचकर स्थिति को अपनी आंखों से देखना। यही वजह है कि राज्य में जब भी कोई बड़ी आपदा सामने आती है, तो मुख्यमंत्री धामी भी मौके पर दिखाई देते हैं। चाहे पहाड़ों में भारी बारिश से पैदा हुए हालात हों, सड़क हादसे हों या फिर किसी क्षेत्र में राहत-बचाव की जरूरत पड़ी हो, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने को प्राथमिकता दी है।
हालांकि किसी भी हादसे में राहत और बचाव अभियान की सफलता केवल राजनीतिक नेतृत्व से तय नहीं होती। इसके लिए प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय मशीनरी और तकनीकी विशेषज्ञों की सामूहिक भूमिका होती है। लेकिन इन सभी एजेंसियों को एक दिशा में तेजी से सक्रिय करने के लिए नेतृत्व की तत्परता जरूरी होती है। मुख्यमंत्री की शुरुआती सक्रियता इसी भूमिका को मजबूत करती दिखाई देती है।

चमोली की घटना ने एक बार फिर यह सवाल भी सामने रखा है कि पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों और टनल परियोजनाओं के दौरान सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता कैसे दी जाए। किसी भी हादसे के बाद राहत-बचाव तत्काल जरूरत होती है, लेकिन उसके बाद हादसे के कारणों की जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय भी उतने ही जरूरी होते हैं। सरकार के सामने चुनौती केवल वर्तमान संकट से निपटने की नहीं, बल्कि भविष्य के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की भी है।
चमोली टनल हादसे में भी मुख्यमंत्री का घटनास्थल तक पहुंचना इसी भरोसे की राजनीति का हिस्सा माना जा सकता है। संदेश साफ है—संकट की घड़ी में सरकार पीछे नहीं रहेगी, बल्कि राहत और बचाव के लिए पूरा सिस्टम मैदान में उतरेगा। बहरहाल, अब सबसे बड़ी प्राथमिकता टनल हादसे में प्रभावित लोगों की सुरक्षित मदद, राहत-बचाव अभियान को सफल बनाना और घटना के हर पहलू की गंभीरता से समीक्षा करना है।
मुख्यमंत्री की शुरुआती सक्रियता ने सिस्टम को जरूर सक्रिय कर दिया है, लेकिन असली कसौटी यही होगी कि राहत-बचाव अभियान कितनी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठाती है। आपदा की घड़ी में नेतृत्व की पहचान सिर्फ बयान से नहीं, बल्कि मौके पर मौजूदगी और फैसलों की तेजी से होती है। चमोली में मुख्यमंत्री धामी की सक्रियता ने फिलहाल यही तस्वीर सामने रखी है

