नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का औपचारिक ऐलान कर दिया है। संगठन के इस बड़े पुनर्गठन में बी.एल. संतोष को पुनः राष्ट्रीय महासचिव की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा घोषित इस नई टीम का सीधा असर देशभर में पार्टी के कामकाज, आगामी चुनावी रणनीतियों और विभिन्न राज्यों के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा।
नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में कुल 13 प्रमुख नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। संगठन को धरातल पर मजबूत करने के लिए शिवप्रकाश और सावन सिंह को राष्ट्रीय सह महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जो बी.एल. संतोष के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का काम संभालेंगे।
पार्टी ने महासचिव के पद पर अनुभवी नेताओं पर भरोसा बरकरार रखा है। विनोद तावड़े और सुनील बंसल समेत कुल 8 नेताओं को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। इसके अलावा संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने के लिए 16 नेताओं को राष्ट्रीय मंत्री के पद पर नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का नया राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि राजेश मंगल को राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। वहीं, केंद्रीय कार्यालय प्रबंधन के लिए तरुण चुघ को राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी और महेंद्र पांडे को राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री नियुक्त किया गया है।
विशेष क्षेत्रों और विभागों की बात करें तो डॉ. संबित पात्रा को नॉर्थ ईस्ट का संयोजक और राजीव बब्बर को सह-संयोजक बनाया गया है। इसके साथ ही विष्णु दत्त शर्मा को प्रकोष्ठ संकुल संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे पार्टी के विशिष्ट अभियानों को मजबूती मिलेगी।
मीडिया और जनसंचार विभाग में बड़ा बदलाव करते हुए अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनाया गया है। उनके साथ प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। सोशल मीडिया विभाग में वैभव महस्के को संयोजक और प्रीति गांधी समेत 4 नेताओं को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है।
युवा, महिला और किसान वर्गों के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए बीजेपी के सातों मोर्चों के नए राष्ट्रीय अध्यक्षों के नामों की भी घोषणा कर दी गई है। ये सभी मोर्चों के प्रमुख देश भर में अपने-अपने वर्गों के बीच संगठनात्मक विस्तार का काम करेंगे।
बीजेपी की इस नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में क्षेत्रीय संतुलन का खास ध्यान रखा गया है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड समेत कई प्रमुख राज्यों के नेताओं को नई टीम में प्रतिनिधित्व देकर अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं।

