देहरादून। विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई के नेतृत्व में उच्चस्तरीय टीम ने बुधवार को देहरादून स्थित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का दौरा किया। इस दौरान टीम ने ‘यूप्रीपेयर’ योजना के तहत प्रदेश में चल रहे विकास और सुरक्षा कार्यों का जायजा लिया। विश्व बैंक के अधिकारियों ने उत्तराखंड को आगे भी आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में वित्तीय सहयोग जारी रखने का ठोस भरोसा दिया।
समीक्षा बैठक के दौरान सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने राज्य को मिल रहे निरंतर आर्थिक सहयोग के लिए विश्व बैंक का आभार जताया। उन्होंने जानकारी दी कि विश्व बैंक की मदद से प्रदेश में 36 नए पुलों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। ये पुल आपदा के समय प्रभावित इलाकों में संपर्क मार्ग बनाए रखने और राहत सामग्री पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
यूप्रीपेयर परियोजना के तहत केवल पुल ही नहीं, बल्कि आपात स्थिति से निपटने के लिए कई अत्याधुनिक कार्य किए जा रहे हैं। इनमें सुरक्षित आपदा शेल्टरों का निर्माण, उन्नत बचाव उपकरणों की खरीद और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों को सुरक्षित करने के लिए स्लोप स्टेबलाइजेशन का काम शामिल है। विश्व बैंक की टीम ने इन सभी प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर संतोष जताया।
विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर पास्कल डोनोहोई ने भूस्खलन रोकने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर आपदा सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयास बेहद सराहनीय हैं।
अपने दौरे के दौरान विश्व बैंक प्रतिनिधिमंडल ने यूप्रीपेयर योजना के तहत बने अत्याधुनिक USDMA भवन का भी निरीक्षण किया। यह भवन पूरी तरह से भूकंपरोधी तकनीक और ‘बेस आइसोलेशन’ प्रणाली पर आधारित है। टीम ने भवन के सुरक्षा मानकों और आपदा प्रतिरोधी निर्माण शैली की जमकर तारीफ की।
विश्व बैंक की ओर से मिले इस भरोसे से उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक मजबूती मिलेगी। इस वित्तीय और तकनीकी सहयोग से प्रदेश में आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना के निर्माण को आने वाले दिनों में और तेजी मिलने की उम्मीद है।

