त्योहारों से पहले महंगाई का डबल झटका: गेहूं 8% महंगा, अब बढ़ेंगे खाद्य तेल के दाम

ख़बर शेयर करें

नई दिल्ली।देश में त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले आम आदमी की रसोई के बजट पर महंगाई की दोहरी मार पड़ने जा रही है। वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध, मौसम के बदलते मिजाज और बाजार में शॉर्ट कवरिंग के चलते घरेलू मंडियों में पिछले एक महीने के भीतर गेहूं की कीमतें 8 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। बाजार विशेषज्ञों का दावा है कि गेहूं के बाद अब खाद्य तेलों (सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल) की कीमतों में भी भारी उछाल आने की पूरी आशंका है, जो सीधे तौर पर आम उपभोक्ता की जेब पर बड़ा असर डालेगा।

वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतों में आई इस तेजी का मुख्य कारण यूक्रेन के बंदरगाहों पर हाल ही में हुए हमले और काला सागर मार्ग से होने वाली वैश्विक आपूर्ति में बढ़ता खतरा है। इस तनाव की वजह से शिकागो गेहूं वायदा पिछले सत्र में 5 फीसदी उछलकर दो महीने के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर, अजोव सागर और केर्च जलडमरूमध्य में प्रतिबंधों के चलते रूस से होने वाले गेहूं के निर्यात में भी बड़ी रुकावट आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है।

यह भी पढ़ें -  भारत में सेमीकंडक्टर मिशन के लिए ₹1.27 लाख करोड़ की मुहर, काशी को मिले दो एलिवेटेड हाईवे

अंतरराष्ट्रीय बाजार के इस संकट का सीधा और आक्रामक असर भारतीय मंडियों पर दिखने लगा है। पिछले एक महीने के दौरान मध्य प्रदेश की इंदौर मंडी में गेहूं के दाम सबसे अधिक 8.44 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। इसके अलावा दिल्ली, कानपुर और कोटा जैसी देश की प्रमुख मंडियों में भी गेहूं की कीमतें औसतन 3.5 से 4 फीसदी के बीच उछल चुकी हैं, जिससे आने वाले दिनों में आटे की कीमतों में तेजी आना तय माना जा रहा है।

एक महीने में देश की प्रमुख मंडियों में ऐसे बढ़े गेहूं के दाम (रुपये प्रति क्विंटल):

मंडी17 जून के भाव16 जुलाई के भाव
इंदौर2,4762,685
दिल्ली2,6882,785
कोटा2,5752,670
कानपुर2,5002,602
राजकोट2,5752,600

गेहूं की कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू स्तर पर मौसम की मार भी एक बड़ा कारण है। बढ़ता तापमान, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। इसी चिंता में व्यापारियों ने अगले रबी सीजन के उत्पादन पूर्वानुमान को पहले के अनुमानित 11.40 करोड़ टन से घटाकर 11.35 करोड़ टन कर दिया है, जो शुरुआती उम्मीदों से काफी कम है।

यह भी पढ़ें -  वंदे मातरम अपमान पर सजा और MSME-आयकर पर नए बिल लाएगी सरकार, देखें पूरी लिस्ट

खाद्य तेलों की कीमतें बढ़ने के 4 बड़े कारण:

त्योहारी सीजन से ठीक पहले खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी आने के चार प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं, जिसमें सबसे पहली चिंता सोयाबीन की खेती को लेकर है क्योंकि इस साल देश में इसका रकबा करीब 6 फीसदी तक कम रहने की आशंका है और यदि अगले 15 दिनों में बारिश नहीं सुधरी तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी 5 से 7 फीसदी तक गिर सकता है।

दूसरी ओर, वैश्विक बाजार में पाम तेल की कमी और घरेलू स्तर पर सरसों व सोयाबीन का पर्याप्त स्टॉक होने के चलते भारत ने खाद्य तेलों का आयात कम कर दिया था, जिससे अब अचानक घरेलू स्टॉक पर दबाव बन गया है। हालांकि वर्तमान में एफएमसीजी कंपनियों और स्टॉकिस्टों की मांग थोड़ी सुस्त जरूर है, लेकिन अगस्त के पहले हफ्ते से ही बाजार में रक्षाबंधन और दिवाली की चौतरफा मांग शुरू हो जाएगी जो कीमतों को तेजी से ऊपर की तरफ धकेलेगी।

यह भी पढ़ें -  Global Energy Crisis: ईरान ने दी तेल-गैस सप्लाई ठप करने की धमकी, अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

इसके अतिरिक्त वैश्विक स्तर पर पाम तेल का इस्तेमाल बायोफ्यूल बनाने में लगातार बढ़ रहा है जिससे सोया और सूरजमुखी तेल पहले से ही महंगे हो रहे हैं, तथा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते भारतीय रुपये ने तेल का आयात करना और अधिक खर्चीला बना दिया है।

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले दिनों में खाद्य तेलों के दाम लगातार ऊंचे बने रहेंगे। सूरजमुखी तेल के दाम 1,580 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल यानी 160 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बने रहने के आसार हैं। वहीं, सोयाबीन तेल भी 1,420 रुपये प्रति क्विंटल के मजबूत स्तर पर बना रहेगा, जिससे इसमें किसी भी तरह की मंदी की गुंजाइश खत्म हो गई है, जबकि निचले स्तर पर आ चुका पाम तेल 1,340 से 1,350 रुपये के स्तर पर तगड़ी लिवाली के साथ वापसी कर रहा है।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad