नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के विकास को नई रफ्तार देने वाले कई ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगाई गई है। कैबिनेट ने भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और रिसर्च का ग्लोबल हब बनाने के लिए ₹1,27,500 करोड़ की ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को हरी झंडी दे दी है।
इसके साथ ही सरकार ने कुल ₹2,19,353 करोड़ की 7 बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसका सीधा असर देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वाराणसी की यातायात व्यवस्था पर पड़ेगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इन ऐतिहासिक फैसलों में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना और नई यूरिया नीति-2026 शामिल हैं।
‘इसके अलावा, धर्मनगरी वाराणसी की सूरत बदलने के लिए ₹25,446 करोड़ से अधिक की लागत से दो मेगा एलिवेटेड हाईवे कॉरिडोर बनाने का सबसे बड़ा फैसला लिया गया है, जिससे शहर को ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए बड़ी मुक्ति मिल जाएगी।केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, ‘सेमीकॉन 2.0’ मिशन मुख्य रूप से छह महत्वपूर्ण स्तंभों पर आधारित है, जिसमें पहले स्तंभ के तहत देश के 105 स्टार्टअप्स को चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में बढ़ावा देने के साथ पेटेंट व रणनीतिक उत्पादों के विकास को गति दी जाएगी, जबकि दूसरे स्तंभ में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए जरूरी मशीनों, रसायनों और कच्चे माल के घरेलू उत्पादन व अनुसंधान को बल मिलेगा।
इसी तरह, तीसरे स्तंभ के माध्यम से देश में अत्याधुनिक फैब्रिकेशन संयंत्रों लगाने की रफ्तार को तेज किया जाएगा, चौथे स्तंभ में चिप की पैकेजिंग और परीक्षण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारतीय व वैश्विक कंपनियों को आकर्षित किया जाएगा, पांचवें स्तंभ में इनोवेशन और रिसर्च को वैश्विक स्तर तक ले जाने के लिए भारी निवेश होगा और छठे स्तंभ के तहत वर्तमान में 315 विश्वविद्यालयों में 68 हजार छात्रों को मिल रहे चिप डिजाइन प्रशिक्षण के दायरे को और अधिक व्यापक बनाकर भविष्य के लिए एक मजबूत टैलेंट पूल तैयार किया जाएगा।
कैबिनेट द्वारा वाराणसी के लिए मंजूर किए गए इन दोनों बड़े प्रोजेक्ट्स में पहले कॉरिडोर के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-19 से वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाले 46.039 किलोमीटर लंबे और 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड हाईवे का निर्माण किया जाएगा, जिस महा-परियोजना पर अकेले ₹14,447.64 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इस रूट पर गंगा नदी के ऊपर एक शानदार 910 मीटर लंबा केबल-स्टे पुल व 1.32 किलोमीटर लंबा एक पैदल पुल भी बनाया जाएगा। वहीं, दूसरे कॉरिडोर के रूप में वरुणा नदी के किनारे ₹10,998.32 करोड़ की लागत से 43.218 किलोमीटर लंबा संपर्क कॉरिडोर तैयार किया जाएगा, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को सीधे वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने का काम करेगा और यहां फ्लाईओवरों व रैंप का एक बड़ा जाल बिछाया जाएगा।
इन दोनों चमचमाते एलिवेटेड हाईवे कॉरिडोर का विकास भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल के तहत किया जाएगा। कैबिनेट के इन फैसलों से न सिर्फ तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई दिशा मिलेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश में लाखों नए रोजगार और व्यावसायिक अवसरों के रास्ते खुलेंगे।

