Uttarakhand: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में अब ड्रोन से पहुंचेगी डाक, पौड़ी से ट्रायल शुरू

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उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय इलाकों में डाक सेवाओं को हाईटेक और रफ्तार देने के लिए डाक विभाग ने एक ऐतिहासिक और आधुनिक पहल की है। उत्तराखंड डाक सेवा के निदेशक दिनेश मिस्त्री के मुताबिक, पहाड़ी क्षेत्रों में समय पर चिट्ठियां, पार्सल और जरूरी दस्तावेज पहुंचाने के लिए विभाग अब ड्रोन तकनीक का सहारा ले रहा है, जिसकी शुरुआत पौड़ी गढ़वाल जिले के धूमाकोट क्षेत्र से ट्रायल के तौर पर कर दी गई है।

राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और घुमावदार रास्तों के कारण पहाड़ों में समय पर आवश्यक कागजात या स्पीड पोस्ट पहुंचाना हमेशा से किसी कड़ी परीक्षा जैसा रहा है। विशेषकर मानसून के सीजन में जब भारी बारिश और भूस्खलन से सड़कें बंद हो जाती हैं, तो ग्रामीण इलाकों का संपर्क कट जाता है और डाक पहुंचने में कई दिन लग जाते हैं। इसी समस्या को खत्म करने के लिए Uttarakhand Drone Postal Service की नींव रखी गई है।

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शुरुआत में इसके तहत कुल 10 किलोमीटर की हवाई दूरी का दायरा कवर किया जा रहा है। योजना के पहले चरण को सुचारू रूप से चलाने के लिए डाक विभाग चार अत्याधुनिक ड्रोन हायर कर रहा है। शुरुआती तौर पर इसके माध्यम से केवल आवश्यक डाक, जरूरी दस्तावेज, स्पीड पोस्ट और आपातकालीन जीवनरक्षक दवाएं ही भेजी जाएंगी।

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निदेशक दिनेश मिस्त्री ने बताया कि ड्रोन के जरिए डाक भेजने का यह अपने आप में एक बेहद अनूठा प्रयोग है। कई ऐसे प्रधान और उप डाकघर हैं, जहां से गांवों की जमीनी दूरी तो बहुत ज्यादा है लेकिन हवाई दूरी काफी कम है। ऐसे में ड्रोन घंटों के सफर को महज कुछ ही मिनटों में समेट देगा।

उत्तराखंड में ड्रोन तकनीक का यह इस्तेमाल नया नहीं है, इससे पहले स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सुदूरवर्ती इलाकों तक ब्लड सैंपल और जीवनरक्षक दवाइयां पहुंचाने में ड्रोन अपनी उपयोगिता साबित कर चुका है। पड़ोसी पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में ड्रोन से डाक भेजने की सफल शुरुआत के बाद अब इसी तर्ज पर उत्तराखंड में यह कदम उठाया गया है।

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धूमाकोट में चल रहा यह पायलट प्रोजेक्ट यदि पूरी तरह सफल रहता है, तो आने वाले समय में उत्तराखंड के सभी पर्वतीय और सीमांत जिलों की डाक वितरण प्रणाली को इस ड्रोन सेवा से जोड़ दिया जाएगा, जिससे राज्य के ग्रामीण इलाकों में संचार क्रांति को एक नई गति मिलेगी।

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