उत्तराखंड रोडवेज को झटका: 200 नई BS-6 बसों का टेंडर अचानक निरस्त, यात्रियों की बढ़ीं मुश्किलें

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देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम में लंबे समय से बसों की कमी से जूझ रहे यात्रियों को बड़ा झटका लगा है। देहरादून में 200 नई बीएस-6 बसों की खरीद का टेंडर अचानक निरस्त कर दिया गया है। टेंडर प्रक्रिया रद्द होने से नई बसों के आगमन पर ब्रेक लग गया है और अब पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जा रही है। इस प्रशासनिक फैसले का सीधा असर रोडवेज सेवा पर और रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों पर पड़ेगा।

जुलाई में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में परिवहन निगम के बेड़े को मजबूत करने के लिए 834 नई बसों की खरीद को हरी झंडी दी गई थी। इसके पहले चरण में 200 बीएस-6 बसों के लिए निवार्छित निविदा जारी की गई थी। करीब डेढ़ महीने तक प्रक्रिया चलने के बाद निविदा खोलने के समय इसे अचानक निरस्त कर दिया गया, जिससे खरीद प्रक्रिया में महीनों की देरी होना तय माना जा रहा है।

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टेंडर रद्द करने के पीछे केवल दो ही कंपनियों का निविदा प्रक्रिया में शामिल होना बताया जा रहा है। निगम अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया तय मानकों पर खरी नहीं उतर रही थी। जीएम टेक्निकल भूपेश कुशवाहा ने बताया कि 200 नई बसों की खरीद प्रक्रिया जल्द दोबारा शुरू की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहली बार में मात्र दो कंपनियां आईं जो मानकों के अनुसार नहीं थीं, और दोबारा भी ऐसा होने पर नियमानुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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यह नई बसें मुख्य रूप से मैदानी मार्गों पर चलाने के लिए खरीदी जानी हैं। निगम में मैदानी क्षेत्रों के लिए लंबे समय से नई बसें नहीं खरीदी गई हैं। इससे पहले पर्वतीय मार्गों के लिए 100 नई बसें खरीदी गई थीं, जबकि उस दौरान पर्वतीय बेड़े से कई पुरानी बसें हटाकर मैदानी क्षेत्रों में लगाई गई थीं।

वर्तमान में उत्तराखंड परिवहन निगम पुरानी और जर्जर हो चुकी बसों के सहारे ही संचालित हो रहा है। बेड़े में शामिल कई बसें अपनी निर्धारित समय सीमा पूरी कर चुकी हैं, लेकिन विकल्प न होने के कारण उन्हें मार्गों पर चलाया जा रहा है। स्थिति यह है कि खटारा हो चुकी इन बसों के रखरखाव और बार-बार होने वाली मरम्मत पर निगम को भारी वित्तीय धनराशि खर्च करनी पड़ रही है।

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निविदा प्रक्रिया अचानक निरस्त होने से पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं। नई बसों की खरीद टलने से जहां परिवहन निगम पर जर्जर बसों की मरम्मत का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, वहीं आम यात्रियों को भी मजबूरी में पुरानी और असुरक्षित बसों में सफर करना होगा।