उत्तराखंड के 91 सीमावर्ती गांवों की बदलेगी तस्वीर: वाइब्रेंट विलेज योजना के लिए ₹221 करोड़ का प्रस्ताव

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देहरादून। चीन और नेपाल सीमा से लगे उत्तराखंड के 91 सीमावर्ती गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। देहरादून से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम्य विकास विभाग ने ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत इन गांवों के कायाकल्प के लिए केंद्र सरकार को 221 करोड़ रुपये का विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। इस योजना का सीधा लाभ सीमांत क्षेत्रों के ग्रामीणों को मिलेगा, जिससे उनकी मूलभूत समस्याएं दूर होंगी और गांवों से हो रहा पलायन थमेगा।

वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत इन चयनित गांवों में सड़क, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं को धरातल पर उतारना सरकार की प्राथमिकता है। गौरतलब है कि उत्तराखंड का 658 किलोमीटर लंबा इलाका अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा है, जिसमें से 283 किलोमीटर नेपाल सीमा और 375 किलोमीटर हिस्सा चीन सीमा के अंतर्गत आता है।

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योजना के दायरे में प्रदेश के पांच सीमांत जिलों पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, चंपावत और ऊधमसिंह नगर के कुल 91 गांवों को शामिल किया गया है। इन सभी स्थानों पर बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जाएगा ताकि स्थानीय निवासियों को गांव में ही हर सुविधा मिल सके। योजना के पहले चरण में केंद्र ने 51 गांवों को मंजूरी दी थी, जबकि दूसरे चरण में 40 अन्य गांवों को इसमें जोड़ा गया है।

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विशेष रूप से चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ जिलों के नेपाल सीमा से सटे 40 गांवों में विकास कार्यों के लिए 221 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार कर केंद्र को भेजी गई है। इसमें पर्यटन विभाग सहित अन्य विभागों के विकास प्रोजेक्ट्स को शामिल किया गया है, जिससे सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा तेजी से विकसित हो सके।

राज्य सरकार ने वाइब्रेंट विलेज योजना में शामिल सभी चयनित गांवों में पांच-पांच अलग-अलग विकास योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए हैं। ये परियोजनाएं स्थानीय जरूरतों, कनेक्टिविटी, बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं, जो गांवों के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होंगी।

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ग्राम्य विकास सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि प्रदेश के 91 गांवों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए योजना बनाकर केंद्र सरकार को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सीमावर्ती गांवों में पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने से स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे।