उत्तराखंड में रोजाना 1,930 मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण: खरीदें जाएंगे 480 ई-वाहन

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देहरादून। उत्तराखंड के सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के लागू होने को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से देशभर में प्रभावी इन नियमों को उत्तराखंड के सभी शहरी व ग्रामीण निकायों में पूरी तरह लागू करने की तैयारी कर ली गई है। इस नई नीति का सीधा असर प्रदेश के नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, व्यावसायिक संस्थानों और आम जनता पर पड़ेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. धकाते ने बताया कि नए नियमों का मुख्य उद्देश्य कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना और स्रोत पर ही कचरे का पृथक्करण करना है। इस मौके पर सहायक निदेशक पीआईबी देहरादून संजीव सुन्दिरयाल और निदेशक शहरी विकास प्रवीण कुमार भी मौजूद रहे।

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नियमों में बड़े बदलाव की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 2016 के पुराने नियमों में कचरा अलग करने की 3 श्रेणियां थीं। वहीं नए नियम-2026 के तहत अब कचरे को 4 श्रेणियों गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाले कचरे में अलग-अलग करना अनिवार्य होगा।

बल्क वेस्ट जनरेटर के लिए भी मानक स्पष्ट किए गए हैं। 2,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल खपत करने वाले या रोजाना 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान इस श्रेणी में आएंगे। ऐसे प्रतिष्ठानों का पंजीकरण कराना और ऑन-साइट कचरा निस्तारण करना अनिवार्य होगा।

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माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य के हर जिले में ‘डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल‘ का गठन किया गया है। यह सेल निकायों में कचरा प्रबंधन, डंपिंग साइट्स और लीगेसी वेस्ट के निस्तारण की निगरानी कर रही है। प्रदेश में लीगेसी वेस्ट को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य दिसंबर 2026 रखा गया है।

डॉ. धकाते ने बताया कि राज्य में शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हो रहा है। 4 श्रेणियों में कचरा उठाने के लिए 500 गाड़ियों में 4 अलग-अलग डिब्बे बनाए जा रहे हैं। वाहनों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए डिजिटल व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू कर दिया गया है।

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वर्तमान में उत्तराखंड में रोजाना 1,930 मीट्रिक टन ठोस कचरा पैदा होता है, जिसमें से लगभग 1,800 मीट्रिक टन कचरे का रोजाना वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जा रहा है। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए भी अलग से प्लांट काम कर रहे हैं।

कचरा संग्रहण को मजबूत करने के लिए सरकार 657 नए वाहन खरीद रही है, जिसमें 480 पर्यावरण-अनुकूल ई-वाहन शामिल हैं। फिलहाल प्रदेश में 22 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, 50 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी और 600 से अधिक वेस्ट कंपोस्टर चालू हैं।