देहरादून। उत्तराखंड के बर्फबारी प्रभावित दुर्गम पर्वतीय इलाकों में आगामी 1 सितंबर से जनगणना का कार्य शुरू होने जा रहा है। देश के महारजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। राज्य के उच्च पर्वतीय और शीतकाल में बर्फ से ढके रहने वाले क्षेत्रों के लिए अलग से विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया है, ताकि समय रहते प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की जा सके।
महारजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, देश भर में जहां अगले साल फरवरी महीने में जनगणना की शुरुआत होगी, वहीं उत्तराखंड के बर्फबारी वाले 134 कसबों और गांवों में 1 से 30 सितंबर के बीच ही यह प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी। इसके बाद अक्टूबर महीने में एक बार फिर से आंकड़ों के पुनरीक्षण का काम किया जाएगा।
जनगणना प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए चार प्रमुख जिलों के दुर्गम क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है, जिनमें प्रमुख तहसीलों के तहत आने वाले क्षेत्र शामिल हैं। इसके अंतर्गत उत्तरकाशी जिले के मोरी तहसील के 36 गांव, राजगढ़ी के 17 गांव, भटवाड़ी के 17 गांव और गंगोत्री नगर पंचायत क्षेत्र।
चमोली जिले के ज्योतिर्मठ तहसील के 22 गांव, चमोली के 2 गांव और बद्रीनाथ नगर पंचायत क्षेत्र, वहीं रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ तहसील के 5 गांव और केदारनाथ नगर पंचायत क्षेत्र और पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील के 20 गांव और मुनस्यारी तहसील के 15 गांव सम्मिलित किए गए हैं।
इन सभी 134 चिह्नित इलाकों में 30 सितंबर तक प्रगणक घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे और अक्टूबर में पुनरीक्षण का काम पूरा करेंगे। इन विशेष बर्फबारी वाले क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य सभी मैदानी और सामान्य पर्वतीय हिस्सों में देश के बाकी हिस्सों के साथ अगले साल फरवरी में ही जनगणना का कार्य शुरू किया जाएगा।

