उत्तराखंड SIR: देहरादून में भाजपा और कांग्रेस अलर्ट, यूकेडी ने नहीं बनाए बूथ लेवल एजेंट

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उत्तराखंड के देहरादून जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जिसमें भाजपा और कांग्रेस बेहद सक्रिय नजर आ रहे हैं, जबकि उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से कोई खास तैयारी नहीं दिख रही है।

डीएम व जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कलेक्ट्रेट में राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर जानकारी दी कि जिले के 10 विधानसभा क्षेत्रों के 1,882 बूथों पर BJP ने 1,839 और कांग्रेस ने 1,717 बूथ लेवल एजेंट नियुक्त कर दिए हैं। वहीं, CPI(M) ने भी अपने 378 एजेंट तैनात किए हैं, लेकिन राज्य में खुद को तीसरे विकल्प के रूप में पेश करने वाली यूकेडी ने अब तक अपने बीएलए-2 नियुक्त नहीं किए हैं, जिससे उसकी सांगठनिक सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।

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प्रशासन ने बताया कि प्री-एसएसआईआर के तहत जिले के कुल 13,76,813 मतदाताओं में से 11,06,652 की मैपिंग पहले ही पूरी की जा चुकी है, और सभी दलों से 7 जून से पहले अपने बीएलए-2 बनाने की अपील की गई है।

इस बीच, बैठक में कांग्रेस की प्रदेश महासचिव गोदावरी थापली ने पुरुकुल के एक बूथ पर माँ-बेटी को बीएलओ और सहायक बीएलओ बनाने पर पारदर्शिता का सवाल उठाते हुए कड़ी आपत्ति जताई और इस पद पर केवल सरकारी कर्मचारियों को रखने की मांग की।

दूसरी तरफ, चुनावी प्रक्रिया को सटीक बनाने के लिए अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि यदि कोई मतदाता घर पर नहीं मिलता है, तो बीएलओ एक नहीं बल्कि तीन-तीन बार उनके घर दस्तक देंगे और फिर भी न मिलने पर गेट पर नोटिस चस्पा किया जाएगा ताकि कोई भी पात्र नागरिक वोट देने से न छूटे।

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ड्रॉपआउट छात्राओं को दोबारा स्कूल लाने के निर्देश

जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुकीं छात्राओं को एक बार फिर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को एक ठोस और परिणामोन्मुखी कार्ययोजना पर काम करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

जिले में बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से संचालित ‘नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट’ की समीक्षा बैठक करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का लक्ष्य केवल इन बालिकाओं का विद्यालय में दोबारा नामांकन कराना ही नहीं है, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा तक पहुँचाना है।

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इस मुहिम को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए जिलाधिकारी ने प्राथमिक स्तर से लेकर माध्यमिक शिक्षा तक ऐसी सभी बालिकाओं की पहचान करने हेतु एक व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने किसी भी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। इस पूरे अभियान को सुचारू रूप से चलाने और इसकी कड़ाई से मॉनिटरिंग करने के लिए डीएम डॉ. चौहान ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को इस विशेष अभियान का नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।

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