उत्तराखंड में नदियों के पुनर्जीवन को ₹60 करोड़ की हरी झंडी, 54 पौराणिक धारा-नौले का होगा कायाकल्प

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देहरादून। उत्तराखंड में जल संकट को दूर करने और नदियों के जलस्तर को सुधारने के लिए सरकार ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। देहरादून सचिवालय में ‘स्प्रिंग एंड रिवर रीजुवेनेशन अथॉरिटी’ की राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की सातवीं बैठक में बागेश्वर की गरुड़ गंगा और पौड़ी की पश्चिमी नयार नदी के पुनरुद्धार के लिए करीब 60 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही हरिद्वार जिले के भूजल स्तर को सुधारने के लिए 49 कृत्रिम रिचार्ज शाफ्ट बनाने का भी बड़ा फैसला लिया गया है।

जलागम सचिव दिलीप जावलकर की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश के जल स्रोतों को पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवित करने पर सहमति बनी। इस बड़े प्रोजेक्ट का सीधा फायदा ग्रामीण इलाकों को मिलेगा, जहां पानी की किल्लत एक बड़ी समस्या है। बैठक में अफसरों ने बताया कि इस समय राज्य के सभी 13 जिलों में एक-एक प्रमुख नदी का चयन कर उनका वैज्ञानिक आधार पर जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जिसके लिए अब तक 120 करोड़ रुपये से अधिक की DPR तैयार हो चुकी है।

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‘भागीरथ ऐप’ से 4,490 जल स्रोतों की डिजिटल मैपिंग

बैठक में जल संरक्षण के क्षेत्र में हुए तकनीकी बदलावों के आंकड़े भी सामने रखे गए है। ‘SARA’ द्वारा विकसित ‘भागीरथ ऐप’ के जरिए प्रदेशभर के 4,490 जल स्रोतों का GIS आधारित डिजिटल मानचित्रीकरण पूरा हो चुका है।

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राज्य की कुल 5,775 जल संरचनाओं और जल स्रोतों की पहचान कर उनका पूरा डेटाबेस तैयार कर लिया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में ‘सारा’ के माध्यम से पूरे उत्तराखंड में जल संरक्षण की कुल 86 परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है।

54 पौराणिक जल धरोहरों का होगा कायाकल्प

बैठक के दौरान पारंपरिक जल स्रोतों को सहेजने के लिए चल रही ‘धारा-नौला संवर्धन योजना’ की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि अब तक राज्यभर में कुल 697 पारंपरिक धारा-नौलों की पहचान की जा चुकी है।

पहले चरण में ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व वाले 54 प्रमुख धारा-नौलों के संरक्षण और उनके पुनर्जीवन की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इन सभी प्राचीन जल धरोहरों को बचाने के लिए स्थानीय समुदाय की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

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इसके अलावा, मैदानी क्षेत्र को राहत देने के लिए हरिद्वार जिले में करीब 2.40 करोड़ रुपये की लागत से 49 आर्टिफिशियल रिचार्ज शाफ्ट स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगी। इसका मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान वर्षा जल का अधिकतम पुनर्भरण सुनिश्चित करना है।

इस बैठक में मुख्य रूप से परियोजना निदेशक जलागम हिमांशु खुराना, एसीईओ ‘सारा’ कहकशां नसीम, डिप्टी डायरेक्टर डीएस रावत और सीएफओ जलागम दीपक भट्ट सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जो इस पूरे प्रोजेक्ट की जमीनी मॉनिटरिंग करेंगे।

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