Dehradun: डिजिटल होगा MDDA, ऑटो-रिजेक्ट हुईं 399 नक्शा फाइलों का नए सिरे से होगा निस्तारण

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देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए बड़े प्रशासनिक फैसले लिए हैं। 19 जुलाई 2026 को देहरादून में उपाध्‍यक्ष बंशीधर तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति, तकनीकी खामियों, डाटा सुरक्षा और वित्तीय मॉड्यूल की समीक्षा की गई। इस निर्णय का सीधा असर देहरादून और मसूरी में घर या व्यावसायिक परिसर का नक्शा पास कराने वाले सैकड़ों आवेदकों पर पड़ेगा।

समीक्षा के दौरान सामने आया कि सिस्टम में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण कुल 399 ऑनलाइन मानचित्र पत्रावलियां समय-सीमा बीतने पर स्वतः ‘ऑटो रिजेक्ट’ या ‘डीम्ड एप्रूव्ड’ हो गई थीं। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने सभी 399 पत्रावलियों को निरस्त कर आवेदकों से दोबारा री-सबमिट कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवेदकों से कोई अतिरिक्त शुल्क या परेशानी न हो और सभी फाइलों का नए सिरे से पारदर्शी निस्तारण किया जाए।

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इसके अलावा, पोर्टल पर एक ही आवेदन के सापेक्ष स्वतः दोहरी या डुप्लीकेट फाइलें बनने की समस्या पर भी कड़ा संज्ञान लिया गया। उपाध्यक्ष ने तकनीकी टीम को निर्देश दिए कि प्रभावित पत्रावलियों को तुरंत दुरुस्त किया जाए और सॉफ्टवेयर में ऐसा स्थायी सुधार किया जाए ताकि भविष्य में डुप्लीकेट पत्रावली जनरेट ही न हो सके।

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नक्शा फाइलों के तय समय-सीमा में निस्तारण के लिए ऑनलाइन प्रणाली में अधिकारियों हेतु ‘अलर्ट सिस्टम’ लागू किया जाएगा। अब समय-सीमा समाप्त होने से पहले ही अधिकारियों को Pop-up, Notification और Alert के जरिए पेंडिंग फाइलों की जानकारी मिल जाएगी। इससे अधिकारियों को काम पूरा करने का पर्याप्त समय मिलेगा और फाइलें खुद-ब-खुद ऑटो-रिजेक्ट होने से बचेंगी।

डाटा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एमडीडीए अब अपना ‘डेडिकेटेड सर्वर’ और बैकअप सिस्टम स्थापित करेगा, ताकि रिकॉर्ड साइबर खतरों से सुरक्षित रहे। इसके साथ ही एमडीडीए के सभी दस्तावेजों को एकीकृत करने के लिए एक एआई आधारित एप्लिकेशन भी विकसित की जाएगी, जिससे एक ही सर्च में पूरा रिकॉर्ड अधिकारियों के सामने उपलब्ध हो सकेगा।

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वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एमडीडीए के फाइनेंस मॉड्यूल की समीक्षा करते हुए प्रतिदिन की सभी वित्तीय प्रविष्टियों का उसी दिन अनिवार्य रूप से समाधान करने के आदेश दिए गए हैं। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी और सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण की प्राथमिकता मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को सरल और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाना है ताकि आम जनता को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

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