देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मूसलाधार बारिश के चलते राज्यभर में 147 सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे हजारों लोगों की आवाजाही और जरूरी सामान की आपूर्ति ठप पड़ गई है। बारिश और भूस्खलन से कई गांवों का तहसील व जिला मुख्यालयों से संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे मरीजों को कांडी-डंडी में बिठाकर पैदल अस्पताल ले जाने की नौबत आ गई है।
प्रदेश में बारिश से अब तक 1942 सड़कों को नुकसान पहुंचा है। लोनिवि के विभागाध्यक्ष राजेश शर्मा के अनुसार सड़कों की मरम्मत के लिए करीब 190 करोड़ रुपये की जरूरत है। सभी डिवीजनों को सड़कें जल्द खोलने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन लगातार बारिश काम में बाधा डाल रही है।
राजधानी देहरादून में मलबे के कारण 14 सड़कें बंद हैं, जिससे मसूरी-दून मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कालसी, साहिया, रायपुर ब्लॉक के अलावा मालदेवता और किमाड़ी मार्ग भी बाधित हैं। डीएम डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि सभी रास्तों को खोलने के लिए राहत टीमें लगातार काम कर रही हैं।
चमोली में बद्रीनाथ हाईवे समेत 32 ग्रामीण सड़कें बंद होने से 10 हजार से अधिक आबादी प्रभावित है। विरही-निजमुला मार्ग बंद होने से 14 गांवों का संपर्क कट गया है। उधर, उत्तरकाशी के मोरी में सड़क बंद होने से एक बीमार महिला को कांडी में बिठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
रुद्रप्रयाग में तेज बारिश से 10 गांवों का संपर्क कट गया है और सिरोबगड़ में ऑल वेदर रोड बार-बार बंद हो रही है। पिथौरागढ़ के होकरा में सड़क 13 जुलाई से बंद होने के कारण ग्रामीणों को दवाओं के लिए 24 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। बागेश्वर के गरुड़ में भी 12 सड़कें बंद हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर समीक्षा की। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को खुद ग्राउंड पर उतरकर बंद सड़कों को तेजी से खोलने, पेयजल-बिजली बहाल करने और नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं।

