देहरादून। उत्तराखंड में शहरों से अपने गांव लौटने वाले प्रवासियों के लिए स्वरोजगार शुरू करना अब बेहद आसान होगा। प्रदेश में रिवर्स माइग्रेशन को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार हर जिले में ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ के तहत ‘प्रवासी सेल’ गठित करने जा रही है। देहरादून में मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह सेल गांव लौटकर नया काम-धंधा शुरू करने वाले लोगों को तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही छत के नीचे मुहैया कराएगा।
ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. शरद सिंह नेगी ने अपने विस्तृत सर्वे के आधार पर राज्य सरकार को यह अहम सिफारिश भेजी है। इस व्यवस्था के लागू होने से उन हजारों प्रवासियों को सीधा फायदा मिलेगा, जो शहरों की नौकरी छोड़कर अपने पैतृक गांव में स्वरोजगार स्थापित करना चाहते हैं।
आयोग की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2018 के बाद से प्रदेश के सभी 13 जिलों के 398 गांवों में प्रवासियों की वापसी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 तक कुल 6,282 प्रवासी अपने पैतृक गांवों में लौट चुके हैं। इन्हीं आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रवासियों को उनके गांव में ही स्थायी रोजगार से जोड़ने का खाका तैयार किया है।
प्रस्तावित ‘प्रवासी सेल’ बनने से आवेदकों को स्वरोजगार योजनाओं, लोन और प्रशासनिक एनओसी के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सभी सुविधाएं एक जगह मिलने से कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय बचेगा और लोग आसानी से अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगे।
पलायन निवारण आयोग का मानना है कि यदि प्रवासियों को गांव पहुंचते ही बिना किसी झंझट के मदद मिलेगी, तो वे कृषि, बागवानी, होमस्टे पर्यटन और स्थानीय उद्योगों में तेजी से पैर जमा सकेंगे। सरकार अब आयोग के इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की तैयारी कर रही है।

