Uttarakhand SIR: 13 दिनों में 16 लाख नोटिस बांटने की चुनौती, BLO परेशान

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देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत गड़बड़ियों और नाम-पते की त्रुटियों को सुधारने की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है। राज्य में शुक्रवार शाम तक 8,47,988 मतदाताओं को ही नोटिस थमाए जा सके हैं, जबकि 13 अगस्त की समयसीमा तक कुल 24.30 लाख लोगों तक नोटिस पहुंचाने हैं। ऐसे में अब महज 13 दिनों के भीतर 16 लाख से अधिक नोटिस बांटना निर्वाचन अमले और बूथ लेवल अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

निर्वाचन आयोग के तय शेड्यूल के मुताबिक 13 अगस्त तक नोटिस तामील कराने की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद 11 सितंबर तक दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। हालांकि राज्य के विषम पर्वतीय और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बीएलओ के सामने भौगोलिक तथा तकनीकी बाधाएं आड़े आ रही हैं।

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उत्तराखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों को मुख्य रूप से तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पहला, ग्रामीण क्षेत्रों में दिन के समय महिलाएं खेतों में काम पर होती हैं और पुरुष नौकरी के सिलसिले में बाहर रहते हैं, जिससे अधिकांश घरों में ताले लटके मिलते हैं।

दूसरा, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जैसे पर्वतीय जिलों के दूरस्थ बूथों से मकान 1.5 से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, जहां मूसलाधार बारिश के बीच केवल पैदल ही पहुंचा जा सकता है। तीसरा, पौड़ी और नैनीताल के दूरस्थ इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क पूरी तरह ठप होने के कारण निर्वाचन ऐप काम नहीं कर रहा, जिससे नोटिस थमाते समय अनिवार्य लाइव फोटो अपलोड करने में गंभीर तकनीकी समस्या आ रही है।

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देहरादून के लोअर नथनपुर और रुड़की क्षेत्र के बीएलओ व प्रतिनिधियों ने बताया कि रोजगार के चलते कई लोग शहरों से बाहर हैं। लोग सुबह के वक्त भी घरों में नहीं मिल रहे और कई बार फोन कॉल भी रिसीव नहीं कर रहे हैं। पिथौरागढ़ के मुनस्यारी और धारचूला जैसे आपदा प्रभावित इलाकों में पोलिंग बूथ से बस्तियों की दूरी काफी अधिक है।

बारिश के कारण उफान पर आए गदेरों और संकरे रास्तों के बीच बीएलओ जान जोखिम में डालकर नोटिस पहुंचा रहे हैं। अल्मोड़ा के सल्ट की बीएलओ महेश्वरी देवी और नैनीताल के धनियाकोट में बीएलओ 3 किलोमीटर तक पैदल चलकर काम कर रहे हैं।

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मैदानी जिलों में हालांकि प्रक्रिया तुलनात्मक रूप से बेहतर है, लेकिन देहरादून और ऊधम सिंह नगर जैसे बड़े जिलों में घनी आबादी के कारण बीएलओ को मतदाताओं के घर खोजने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।

तकनीकी समस्याओं और लाइव फोटो के नियम ने काम को और धीमा कर दिया है। पौड़ी के बीरोंखाल, रिखणीखाल और नैनीताल के दूरस्थ इलाकों में खराब इंटरनेट के कारण निर्वाचन ऐप पर डेटा और फोटो अपलोड ही नहीं हो पा रही है, जिससे प्रक्रिया बार-बार अटक रही है।