Uttarakhand: मंत्री गणेश जोशी आय से अधिक संपत्ति मामले में विजिलेंस कोर्ट का समन, 3 सितंबर को पेशी

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार के कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी को विशेष विजिलेंस कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में समन जारी किया है। अदालत के इस आदेश के मुताबिक कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को आगामी 3 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होकर अपना पक्ष रखना होगा। आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आए इस कानूनी झटके का सीधा असर प्रदेश की राजनीति, सत्ताधारी भाजपा और धामी सरकार की साख पर पड़ रहा है।

स्पेशल जज विजिलेंस की कोर्ट में 25 जुलाई को हुई सुनवाई के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं के तहत गणेश जोशी को यह समन जारी किया गया है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी अंतिम आदेश पारित करने से पहले आरोपी पक्ष को अपना कानूनी पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना आवश्यक है, जिसके चलते सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तारीख तय की गई है।

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मुख्य आरोपों के अनुसार, आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश सिंह की याचिका में दावा किया गया है कि गणेश जोशी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग को दिए शपथ पत्र में लगभग 9 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी, जो उनकी ज्ञात आय के वैध स्रोतों से काफी अधिक है।

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इसके अलावा, याचिका में बागवानी तथा जैविक खेती के नाम पर किए गए विदेश दौरों, निर्माणाधीन सैन्य धाम परियोजना और अन्य विभागीय कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमतताओं व गड़बड़ियों के गंभीर आरोप भी शामिल हैं। पूर्व में नैनीताल हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन रहा यह मामला अब विधिक प्रक्रिया के तहत देहरादून की विजिलेंस कोर्ट में पहुंचा है, जहां से मंत्री को समन जारी किया गया है।

चुनावी वर्ष में विजिलेंस कोर्ट द्वारा जारी इस समन ने प्रदेश का राजनीतिक पारा पूरी तरह चढ़ा दिया है। विपक्षी दल इस संवेदनशील मुद्दे को सरकार के खिलाफ एक बड़े चुनावी हथियार के रूप में भुनाने की रणनीति बना रहे हैं। दूसरी ओर, राजनीतिक गलियारों में इस बात के कयास भी लगातार लगाए जा रहे हैं कि सरकार की छवि और किरकिरी बचाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंत्री गणेश जोशी से इस्तीफा मांगकर जीरो टॉलरेंस का सख्त संदेश दे सकते हैं। फिलहाल मानसूनी सीजन में आए इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है।