Uttarakhand: 3 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब 2026-27 के लिए 1.12 लाख का लक्ष्य तय

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देहरादून। उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही ‘लखपति दीदी योजना’ ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लखपति दीदियों की संख्या 3 लाख 03 हजार के आंकड़े को पार कर गई है। इस सफलता के बाद अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1 लाख 12 हजार अतिरिक्त महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नवंबर 2022 में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक पहुंचाना है। योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 तक राज्य की कुल 3,03,696 महिलाएं लखपति दीदी बनकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। निर्धारित विभागीय लक्ष्यों को समय सीमा से पहले पूरा करने के लिए संबंधित विभागों ने नए वित्तीय वर्ष की तैयारियां तेज कर दी हैं।

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स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अनुदानित और ऋण योजनाओं की मदद से विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। इनमें मुख्य रूप से जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग, मसाला निर्माण, हस्तशिल्प, डेयरी-पशुपालन, मौन पालन, मशरूम उत्पादन और होमस्टे संचालन शामिल हैं। इसके अलावा राज्य में मिलेट से तैयार बेकरी उत्पादों की मांग बढ़ने पर महिलाएं इसके निर्माण से भी अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।

उत्पादित सामग्री की प्रोसेसिंग और बेहतर बाजार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया है। वर्तमान में राज्य में 24 ग्रोथ सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 17 सरस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। स्थानीय उत्पादों की बड़े शहरों और महानगरों में बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सरस मेलों का आयोजन किया जा रहा है।

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स्थानीय ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड पहचान दिलाने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और गुणवत्ता में सुधार किया गया है, जिससे प्रमुख शहरों में इन उत्पादों की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश के सभी 13 जिलों के 95 विकासखंडों में अब तक 5,19,943 महिलाओं को संगठित किया जा चुका है। इस नेटवर्क को संचालित करने के लिए राज्य में 70,767 स्वयं सहायता समूह, 8,179 ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन कार्यरत हैं।

महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने के लिए नीतिगत स्तर पर भी कई निर्णय लिए गए हैं। इनमें सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना, ड्रोन दीदी योजना, सोलर सखी योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मातृशक्ति उत्तराखंड की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की मुख्य संवाहक है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि राज्य के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। सरकार हर स्तर पर महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के लिए प्रतिबद्ध है।

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