नैनीताल। गौलापार में आकार ले रहे प्रदेश के पहले ‘उत्तराखंड क्रीड़ा विश्वविद्यालय’ का निर्माण कार्य अब तेज गति से आगे बढ़ेगा। शनिवार को देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खेल विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना के सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर हर हाल में पूरे किए जाएं और गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
बैठक के दौरान खेल विभाग की ओर से विश्वविद्यालय परिसर में तैयार हो रहे शैक्षणिक भवनों, अत्याधुनिक हॉस्टल, स्पोर्ट्स साइंस सेंटर, इनडोर-आउटडोर स्टेडियम और रिसर्च सेंटरों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हिदायत दी कि यह संस्थान केवल एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि देवभूमि के युवा एथलीटों के भविष्य की नींव है, इसलिए यहाँ हर निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ही होना चाहिए।
विश्वविद्यालय के स्वरूप पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गौलापार क्रीड़ा विश्वविद्यालय को नई खेल नीति और स्टेट विजन डॉक्यूमेंट के अनुसार एक ग्लोबल स्पोर्ट्स हब के रूप में ढाला जाए। यहाँ खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के साथ-साथ स्पोर्ट्स मेडिसिन, हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर, खेल प्रबंधन और स्पोर्ट्स रिसर्च से जुड़ी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि हमारे एथलीटों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए तैयार किया जा सके।
राज्य में खेल संस्कृति के विस्तार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ मेडल जीतना नहीं, बल्कि खेलों को रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा से जोड़ना है। इसके लिए ब्लॉक और जिला स्तर तक खेल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की छिपी हुई प्रतिभाओं को सही समय पर आधुनिक उपकरण, विशेषज्ञ कोचिंग और पोषण मिल सके।
मुख्यमंत्री ने खेल विभाग को निर्देश दिए कि क्रीड़ा विश्वविद्यालय परियोजना की नियमित ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की जाए और काम में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर काम को गति दी जाए, ताकि प्रदेश की युवा खेल प्रतिभाओं को जल्द से जल्द इस विश्वस्तरीय संस्थान का लाभ मिलना शुरू हो सके।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्या, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा सहित खेल विभाग के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और इंजीनियर मौजूद रहे।

