उत्तराखंड में ग्राम प्रधानों का जोरदार प्रदर्शन: 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सचिवालय कूच, पुलिस से झड़प

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देहरादून। उत्तराखंड भर के ग्राम प्रधानों ने राजधानी देहरादून में अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आज जोरदार प्रदर्शन किया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से देहरादून पहुंचे सैकड़ों ग्राम प्रधान परेड ग्राउंड में एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए सचिवालय की ओर कूच किया।

सचिवालय पहुंचने से पहले तैनात पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित प्रधान बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें दूसरी बैरिकेडिंग पर रोक लिया। इस दौरान ग्राम प्रधानों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए अपनी मांगें जल्द पूरी करने की पुरजोर मांग उठाई है।

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प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे प्रधान संगठन पिथौरागढ़ के जिला अध्यक्ष हेमराज सिंह बिष्ट ने कहा कि ग्राम प्रधान पिछले करीब पांच महीने से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार सरकार को ज्ञापन सौंप रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी भी मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बताया कि इससे पहले तालाबंदी, विकास भवन घेराव और पंचायती राज निदेशालय में धरना-प्रदर्शन जैसे कई चरणबद्ध आंदोलन किए जा चुके हैं। पिछले दस दिनों से लगातार आंदोलन चलने के बावजूद सरकार की ओर से समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकाला गया है, जिससे प्रधानों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

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वहीं, प्रधान संगठन उत्तराखंड के प्रदेश सचिव और पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र से ग्राम प्रधान किशोर कैल्विन धामी ने स्पष्ट किया कि बैरिकेडिंग तोड़ना उनके आक्रोश और विरोध प्रदर्शन का एक हिस्सा था। ग्राम प्रधानों के मानदेय का गंभीर मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि एक प्रधान गांव के चौमुखी विकास से लेकर ग्रामीणों के सुख-दुख में दिन-रात अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय बेहद कम है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी सूत्रीय मांगों का समाधान नहीं किया, तो प्रधान संगठन आगे बढ़कर दिल्ली के जंतर-मंतर तक कूच करने के लिए बाध्य होगा।