देहरादून। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का दायरा शत-प्रतिशत लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच गया है। संसद में राज्यसभा सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि राज्य के लिए निर्धारित 61.94 लाख लाभार्थियों के मुकाबले अब तक 60.06 लाख पात्रों की पहचान कर ली गई है। इस उपलब्धि से प्रदेश के लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को हर महीने सस्ता राशन मिलना सुनिश्चित हो गया है।
संसद के पटल पर पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के कल्याण का मुद्दा उठाते हुए महेंद्र भट्ट ने सरकार से वित्तीय और चिकित्सीय मदद का ब्योरा मांगा था। इसके जवाब में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने बताया कि केंद्रीय सैनिक बोर्ड और पुनर्वास महानिदेशालय के माध्यम से वीर शहीदों के आश्रितों, विधवाओं और भूतपूर्व सैनिकों को शिक्षा, चिकित्सा, विवाह और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है।
केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान देश और राज्य के सैन्य लाभार्थियों को 904 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता बांटी गई है। इस बड़ी धनराशि से उत्तराखंड के हजारों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सीधे आर्थिक संबल मिला है।
सैनिकों के बच्चों और पूर्व सैनिकों को राहत देते हुए रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) सीटों में रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए विशेष आरक्षण की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, ईसीएचएस (ECHS) योजना के तहत देशभर के पॉलीनिकों में भूतपूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को गुणवत्तापूर्ण और पूरी तरह कैशलेस इलाज मुहैया कराया जा रहा है।
खाद्य सुरक्षा योजना में पारदर्शिता लाते हुए उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने बताया कि फर्जी और अपात्र कार्डधारकों को हटाने का अभियान जारी है। अपात्र लोगों के नाम निरस्त कर वास्तविक जरूरतमंदों को योजना से जोड़ा जा रहा है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति राशन पाने से वंचित न रहे।
अमर उजाला ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, संसद में प्रस्तुत ये आंकड़े साबित करते हैं कि उत्तराखंड में खाद्य सुरक्षा का बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के विशाल सैन्य समुदाय को केंद्रीय योजनाओं का सीधा लाभ समय पर मिल रहा है।

