देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून में बन रहे राज्य के पहले राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अगले साल से इस कॉलेज को शुरू करने की राह में अस्पताल का संचालन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। नेशनल कमिशन फॉर होम्योपैथी के कड़े नियमों के कारण यदि अस्पताल जल्द शुरू नहीं हुआ, तो साल 2027 में कॉलेज की मान्यता का पेंच फंस सकता है।
दरअसल, काउंसिल के नियमों के मुताबिक कॉलेज में छात्रों के दाखिले से कम से कम एक साल पहले से अस्पताल में ओपीडी और आईपीडी सेवाएं चालू होना अनिवार्य है। ऐसे में अगर स्वास्थ्य विभाग और कार्यदायी संस्था ने अस्पताल शुरू करने में देरी की, तो प्रदेश के युवाओं को इस कॉलेज के लिए साल 2028 तक का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
71 करोड़ की लागत से हर्रावाला में हो रहा निर्माण
देहरादून के हर्रावाला में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पास 71 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से इस भव्य मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट के तहत कॉलेज भवन का लगभग 30 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस निर्माण कार्य को पेयजल निगम के माध्यम से तेजी से पूरा कराने की कोशिश की जा रही है।
कॉलेज से जुड़े मुख्य आंकड़े और फैक्ट्स:
- कुल बजट: ₹71 करोड़ (जिसमें से ₹30 करोड़ केंद्र सरकार से प्राप्त हो चुके हैं)।
- कुल सीटें: यह मेडिकल कॉलेज शुरुआती चरण में 60 सीटों के साथ शुरू होगा।
- लक्ष्य: सरकार का इरादा इसे साल 2027 के सत्र से पूरी तरह चालू करने का है।
आयुष विभाग ने निकाला अस्थाई रास्ता
मामले की गंभीरता को देखते हुए होम्योपैथिक विभाग के निदेशक डॉ. जेएल फिरमाल ने बताया कि अगले साल तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। मान्यता की शर्त को पूरा करने के लिए आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर में ही अस्थाई रूप से अस्पताल संचालित करने के लिए जगह मांगी गई है।
अस्पताल को तुरंत शुरू करने के लिए कम से कम 3 से 4 कमरों की तत्काल आवश्यकता है। इसके साथ ही कार्यदायी संस्था पेयजल निगम को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह 6 महीने के भीतर निर्माणाधीन परिसर में अस्पताल ब्लॉक को तैयार करके विभाग को सौंपे, ताकि ओपीडी सेवाएं समय पर लाइव की जा सकें।
उत्तराखंड के युवाओं पर क्या होगा असर?
इस मेडिकल कॉलेज के शुरू होने का राज्य के छात्रों और स्थानीय जनता पर व्यापक असर पड़ेगा। वर्तमान में उत्तराखंड में एक भी राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज नहीं है। इसके कारण बीएचएमएस कोर्स करने के इच्छुक स्थानीय युवाओं को मजबूरन दूसरे राज्यों के महंगे कॉलेजों में जाना पड़ता है।
इसके अलावा हर्रावाला और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में कोई बड़ा होम्योपैथिक चिकित्सालय नहीं है। इस कॉलेज के शुरू होने से न सिर्फ स्थानीय लोगों को मुफ्त और बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि राज्य को नए होम्योपैथिक डॉक्टर मिलने से पर्वतीय क्षेत्रों में भी इस चिकित्सा पद्धति का विस्तार हो सकेगा।

