उत्तराखंड में समय से पहले विधानसभा चुनाव की अटकलें खारिज, सीएम पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान

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देहरादून। उत्तराखंड के सियासी गलियारों में पिछले कई दिनों से चल रही समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने की सभी अटकलों और अफवाहों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। देहरादून में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार को किसी भी स्तर से समय से पहले चुनाव कराने का कोई निर्देश नहीं मिला है। सीएम धामी के इस दो टूक जवाब के बाद प्रदेश की राजनीति में जारी संशय अब पूरी तरह खत्म हो गया है।

यह बड़ा स्पष्टीकरण उस समय आया जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) मुख्यालय में आयोजित एक आपदा प्रबंधन मॉकड्रिल की समीक्षा बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे। बैठक के बाद जब मीडिया ने उनसे जल्द चुनाव होने की सुगबुगाहटों पर सवाल पूछा, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया।

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दरअसल, हाल के दिनों में उत्तराखंड और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में यह चर्चा बेहद तेज थी कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले हरिद्वार कुंभ और देशव्यापी जनगणना की वजह से चुनाव तय समय से पहले कराए जा सकते हैं। कयास लगाए जा रहे थे कि इन दो बड़े आयोजनों में पूरी प्रशासनिक मशीनरी के व्यस्त होने के कारण चुनाव को पहले निपटाया जा सकता है।

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इन चर्चाओं को बल तब और ज्यादा मिला जब भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय और शीर्ष नेतृत्व के उत्तराखंड दौरे अचानक बढ़ गए। पार्टी स्तर पर बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी एक्टिव हो गई थी और पूरी तरह से चुनावी मोड में जुट गई थी।

‘अधिकारी सूचना नहीं, फैसला आयोग के हाथ’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ शब्दों में कहा, “हमें किसी भी स्तर पर यह नहीं कहा गया है कि उत्तराखंड में चुनाव समय से पहले हो रहे हैं। अभी इसको लेकर शासन या संगठन के पास कोई भी औपचारिक या आधिकारिक सूचना नहीं है।”

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मुख्यमंत्री धामी ने देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था का हवाला देते हुए आगे जोड़ा कि चुनाव अपने नियत समय पर होंगे या समय से पहले, इसका फैसला करना पूरी तरह से चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है। उन्होंने साफ किया कि सरकार के स्तर पर ऐसी कोई तैयारी नहीं है और वर्तमान सरकार का पूरा फोकस राज्य के विकास और जनहित की योजनाओं को धरातल पर उतारने पर है।

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