देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज राजधानी देहरादून के आईटी पार्क में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को प्रभावी आपदा प्रबंधन के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस हाई-लेवल प्री-मानसून मॉक ड्रिल और मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों का सीधा असर मानसून के दौरान प्रदेश के सभी 13 जिलों की सुरक्षा, आपदा तंत्र की मुस्तैदी और संवेदनशील क्षेत्रों के निवासियों पर पड़ने वाला है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मानसून के दौरान आने वाली संभावित आपदाओं से पूरी ताकत से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय, बेहतर आपसी समन्वय और आधुनिक तकनीकों का समुचित उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन तंत्र की क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन को केवल राहत एवं बचाव कार्यों तक सीमित न रखकर जोखिम को कम करने, मानसून पूर्व तैयारियों और तकनीक आधारित प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए।
आपदा प्रबंधन से जुड़ेगा AI आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम
तकनीक के समावेशन पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब AI आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग तथा डेटा आधारित जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों को आपदा प्रबंधन से सीधे जोड़ा जा रहा है।
इससे संभावित खतरों का समय रहते सटीक आकलन कर जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सकेगा। आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित रेस्क्यू सुनिश्चित करने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सशक्त बनाया गया है, ताकि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाई जा सके।
सीएम धामी ने कहा कि जल स्रोत संरक्षण, ग्लेशियर अध्ययन, पौधारोपण और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण ही असल में आपदा के जोखिम को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के दौरान प्राप्त अनुभवों एवं कमियों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाए तथा सभी जनपद अगले 72 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही प्रत्येक नागरिक को आपदा सुरक्षा उपायों और आपातकालीन संपर्क नंबरों की जानकारी देने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए।
13 जिलों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं का विमोचन
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड को देश का सबसे सक्षम, तकनीक-सक्षम एवं जनभागीदारी आधारित आपदा प्रबंधन मॉडल बनाना है। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन योजना’ तथा राज्य के सभी 13 जनपदों की ‘जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं’ का आधिकारिक विमोचन भी किया।
प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र रहे अत्याधुनिक उपकरण
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर SDRF,NDRF और अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी का भी बारीकी से अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में विशेष रूप से NDRF द्वारा रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक आपदाओं में उपयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरण मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे।
इसके अतिरिक्त डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, विभिन्न प्रकार के हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन तथा सोनार सिस्टम सहित अनेक आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, लेफ्टिनेंट कर्नल (से.नि) रघुवीर सिंह भण्डारी, सचिव विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप, आईजी अग्निशमन विम्मी सचदेव, अपर सचिव प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा सहित विभिन्न विभागों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

