देहरादून-ऋषिकेश हाईवे चौड़ीकरण में 3000 पेड़ों की आहूति पर गरमायी सियासत, कांग्रेस ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

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जौलीग्रंट। उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। भानियावाला से लेकर ऋषिकेश तक करीब 19 किलोमीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण कार्य प्रशासनिक स्तर पर शुरू कर दिया गया है।

इस प्रोजेक्ट के तहत बीरपुर मोड़ बडकोट वन रेंज से लेकर नटराज चौक वन बैरियर तक करीब तीन हजार पेड़ों को काटने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसका मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर कड़ा विरोध किया है। परवादून कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने प्रभावित वन क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सरकार पर जनता की भावनाओं और पर्यावरण की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

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8 किलोमीटर का ग्रीन जोन और वन्यजीवों पर संकट

कांग्रेस नेता मोहित उनियाल के मुताबिक, इस 19 किलोमीटर लंबे मार्ग का लगभग आठ किलोमीटर का हिस्सा बेहद घने और संरक्षित प्रजाति के जंगलों के बीच से गुजरता है। इस हिस्से में हजारों साल पुराने और दुर्लभ प्रजातियों के वृक्षों को काटा जा रहा है, जिससे पूरा इकोसिस्टम तबाह होने की कगार पर है।

विपक्ष ने सरकार के सामने तकनीकी विकल्प रखते हुए सवाल उठाया कि इस आठ किलोमीटर के संवेदनशील हिस्से में जमीन पर सड़क चौड़ी करने के बजाय जंगल के ऊपर से फ्लाईओवर क्यों नहीं बनाया गया? फ्लाईओवर बनने से नीचे का वन क्षेत्र और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास पूरी तरह सुरक्षित रहता, साथ ही वन्यजीव वाहनों की चपेट में आने से भी बच जाते।

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तापमान 40 डिग्री पार, विकास के नाम पर जंगलों की बलि?

प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत यह है कि बडकोट वन रेंज के भीतर पेड़ों को काटने के लिए पीले रंग के पिलर और मार्किंग लगा दी गई है, और कई विशालकाय पेड़ धराशायी किए जा चुके हैं। कांग्रेस का आरोप है कि विकसित राज्यों और विदेशों में पर्यावरण को बचाते हुए ऐसी परियोजनाएं पूरी की जाती हैं, लेकिन यहाँ सिर्फ विनाश का रास्ता चुना गया।

घाटी के बदलते मौसम पर चिंता जताते हुए कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि देहरादून और ऋषिकेश का तापमान अब 40 डिग्री के पार जाना आम हो गया है। पेड़ और जंगल लगातार कम हो रहे हैं, जिससे ग्लोबल वार्मिंग का असर साफ दिख रहा है।

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कुछ समय पहले ही स्थानीय जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने एयरपोर्ट के जंगलों को बचाने के लिए पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर आंदोलन किया था। कांग्रेस ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस अंधाधुंध कटान को तुरंत रोककर फ्लाईओवर जैसे वैकल्पिक रास्तों पर विचार नहीं किया, तो पूरी घाटी में सरकार के खिलाफ उग्र जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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