उत्तराखंड पुलिस में 4600 ग्रेड पे विवाद: 13 जुलाई को मुख्यालय पर बड़ा प्रदर्शन

ख़बर शेयर करें

देहरादून: उत्तराखंड पुलिस के जवानों को 4600 ग्रेड पे देने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर राज्य में एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़ ली गई है। पुलिस कर्मियों के परिजनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आगामी 13 जुलाई को देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय के मुख्य द्वार पर ‘अधिकार सत्याग्रह’ करने का बड़ा ऐलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन का सीधा असर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नीतिगत फैसलों और पुलिस महकमे के मनोबल पर पड़ सकता है।

सुबह 11:30 बजे शुरू होगा ‘अधिकार सत्याग्रह’

विरोध प्रदर्शन को लेकर जारी किए गए आधिकारिक पोस्टर के अनुसार, 13 जुलाई को सुबह ठीक 11:30 बजे तमाम पुलिस परिवार और सामाजिक संगठन पुलिस मुख्यालय के मुख्य द्वार पर एकत्रित होंगे। आंदोलनकारियों ने इस पूरे मामले को पुलिस कर्मियों के सम्मान, हक और सुरक्षित भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताया है। इसके लिए सोशल मीडिया के जरिए पुलिस परिवारों और आम जनता से भारी संख्या में शामिल होने की अपील की जा रही है।

यह भी पढ़ें -  शौक बड़ी चीज! चोरी का हीरे का हार पहनकर नौकरानी ने बनाई रील, मालकिन ने देखते ही बुला ली पुलिस

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें:

  • वर्षों से लंबित 4600 ग्रेड पे की मांग को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
  • पुलिस महकमे के जवानों के हक और सम्मान की पूरी गारंटी दी जाए।
  • केवल खोखले आश्वासन के बजाय राज्य सरकार इस विषय पर त्वरित और ठोस अंतिम निर्णय ले।
यह भी पढ़ें -  CM धामी से मिला छत्तीसगढ़ के पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल; देवभूमि के सुशासन मॉडल पर हुई चर्चा

अपनी आवाज को और अधिक बुलंद करने के लिए पुलिस परिवारों की ओर से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से भी समर्थन मांगा गया है, जिससे इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सके।

सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

उत्तराखंड पुलिस महकमे में 4600 ग्रेड पे का यह मुद्दा पिछले कई सालों से समय-समय पर जोर पकड़ता रहा है। इससे पहले भी पुलिस कर्मियों के परिजनों ने कई बार प्रदर्शनों, ज्ञापनों और शांतिपूर्ण आंदोलनों के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड के पहले होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर संकट, जानें क्या है पूरा विवाद

यही वजह है कि लंबे समय से सुलग रही यह चिंगारी एक बार फिर आक्रोश बनकर भड़क उठी है। आंदोलनकारियों का सीधा आरोप है कि सरकार ने अब तक केवल वादे किए हैं और वे सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि यदि 13 जुलाई के प्रदर्शन के बाद भी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र तथा तेज किया जाएगा।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad