Uttarakhand: अब एक्सप्रेसवे किनारे लगेगा ‘ग्रीन गोल्ड’, उत्तराखंड फाइबर विकास बोर्ड का अनोखा प्लान

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देहरादून। उत्तराखंड बांस और फाइबर विकास बोर्ड ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को राज्य के सभी एक्सप्रेसवे के किनारे स्थानीय प्रजाति के बांस के पौधे लगाने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मानसून और तेज बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे के ढलानों पर होने वाले मिट्टी के कटाव को रोकना है।

बोर्ड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मीनाक्षी जोशी के अनुसार, एक्सप्रेसवे के किनारे बांस लगाने से न केवल मिट्टी का कटाव और भूस्खलन रुकेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

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विशेषज्ञों के अनुसार, बांस के पौधे रोपने के महज दो से तीन वर्षों के भीतर मिट्टी पर अपनी बेहद मजबूत पकड़ बना लेते हैं। यह मजबूत रूट सिस्टम मूसलाधार बारिश में भी मिट्टी के बहाव को रोकने में पूरी तरह सक्षम होता है, जिससे सड़कों के धंसने और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा काफी कम हो जाता है।

पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और सड़कों का धंसना एक बड़ी समस्या है, जिससे हर साल भारी धन-जन की हानि होती है। एक्सप्रेसवे और हाईवे के किनारों पर बांस रोपने से इस भूस्खलन को नियंत्रित किया जा सकेगा और उपजाऊ मिट्टी को बहने से भी बचाया जा सकेगा।

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पर्यावरण और तकनीकी दृष्टि से भी बांस के कई दूरगामी फायदे हैं। सड़क किनारे बांस का घना आवरण होने से तेज रफ्तार वाहनों से पैदा होने वाला ध्वनि प्रदूषण कम होगा। इसके अलावा, बांस के पौधे अन्य सामान्य पौधों की तुलना में वायुमंडल में 35 फीसदी अधिक ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं।

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पर्यावरण में विशेष योगदान के कारण ही बांस को ‘ग्रीन गोल्ड’ कहा जाता है। बांस के झुरमुट जंगली पशु-पक्षियों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास बनाते हैं। सबसे खास बात यह है कि एक बार लगाने के बाद 50 से 100 वर्षों तक इसकी फसल ली जा सकती है और जंगली जानवर इसे नुकसान भी नहीं पहुंचाते हैं।