Dehradun: 34 करोड़ की कौलागढ़ योजना का टेंडर चौथी बार निरस्त, छीना गया प्रोजेक्ट

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देहरादून। राजधानी देहरादून की अति-महत्वपूर्ण कौलागढ़ पेयजल योजना का टेंडर लगातार चौथी बार निरस्त कर दिया गया है। जल संस्थान के स्तर पर बरती जा रही गंभीर लापरवाही और कंपनियों द्वारा मनमाने रेट कोट किए जाने से नाराज शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए अब इस प्रोजेक्ट का काम जल निगम को सौंप दिया है।

अमृत योजना के तहत शहरी विकास विभाग द्वारा इस परियोजना के लिए 34 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दून के एक बड़े हिस्से में पेयजल आपूर्ति को दुरुस्त करना है। हालांकि, पिछले साल सितंबर में पहली बार टेंडर जारी होने के बाद से अब तक यह प्रक्रिया चार बार रद्द हो चुकी है, जिससे निर्माण कार्य अधर में लटका है।

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टेंडर रद्द होने की मुख्य वजह ठेकेदार कंपनियों के मनमाने रेट और तकनीकी खामियां रहीं। 34 करोड़ के प्रोजेक्ट में एक बार कंपनियों ने सबसे कम 28 करोड़ का रेट कोट किया था, लेकिन तकनीकी कारणों से टेंडर निरस्त हो गया। इसके ठीक दो महीने बाद उन्हीं कंपनियों ने इसी काम का न्यूनतम रेट बढ़ाकर 38 करोड़ रुपये कोट कर दिया, जिसके बाद शासन को टेंडर निरस्त करना पड़ा।

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जल संस्थान की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए शासन ने यह दूसरा बड़ा झटका दिया है। इससे पहले 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सहस्रधारा पेयजल योजना का काम भी जल संस्थान से वापस लेकर जल निगम को सौंपा जा चुका है। लगातार प्रोजेक्ट छिनने से जल संस्थान की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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मामले में पेयजल सचिव रणवीर सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि बार-बार टेंडर निरस्त होने से पेयजल योजना का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। इसी को देखते हुए अब यह काम जल निगम को ट्रांसफर कर दिया गया है, ताकि पारदर्शी प्रक्रिया के साथ जल्द टेंडर फाइनल कर काम शुरू कराया जा सके।