उत्तराखंड में अवैध निर्माण पर CM धामी सख्त, हर विकास प्राधिकरण में बनेगा निगरानी डैशबोर्ड

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आवास विभाग के अधीन विकास प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में बिना अनुमति होने वाले अवैध निर्माणों पर रोक लगाने के लिए हर विकास प्राधिकरण में ‘अवैध निर्माण निगरानी डैशबोर्ड’ बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस आधुनिक प्रणाली से अवैध निर्माण की शुरुआत से लेकर ध्वस्तीकरण तक की हर कार्रवाई की समयबद्ध और पारदर्शी निगरानी संभव होगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मास्टर प्लान, विकास परियोजनाओं, नागरिक सुविधाओं, सौंदर्यीकरण, पार्किंग, आवासीय योजनाओं और अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए स्पष्ट समय सीमा तय कर संबंधित अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, उनका असर धरातल पर दिखना चाहिए। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव विनय शंकर पांडेय और डॉ. आर राजेश कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: कुमाऊं में दूषित पानी से मौतों के बाद सरकार का बड़ा कदम, हल्द्वानी में खुलेगी वाटर टेस्टिंग लैब
May be an image of studying, newsroom and text

अवैध निर्माणों को शुरुआती स्तर पर ही चिह्नित करने के लिए जीआईएस, सैटेलाइट तस्वीरों और ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी। प्राधिकरणों के डैशबोर्ड पर संदिग्ध निर्माण की पहचान, निरीक्षण की तारीख, जारी नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की रियल टाइम स्थिति दर्ज होगी। सीएम ने चेतावनी दी कि यदि किसी अवैध निर्माण में अधिकारियों की मिलीभगत पाई गई, तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री ने इसी माह 15 अक्टूबर तक सभी प्राधिकरण क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण कार्य पूरे करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों की गुणवत्ता जी-20 समिट के दौरान किए गए कार्यों की तरह आकर्षक होनी चाहिए और सड़कों की स्थिति में तत्काल सुधार किया जाए। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी एससी, एसटी और बीपीएल परिवारों की सूची 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

यह भी पढ़ें -  जब मुन्यारी में परगनाधिकारी के कार्यालय परिसर में गूंजे ढोल दमांऊ और रणसिंघा के स्वर
May be an image of one or more people and text that says "उतरासंड नैवभूमि NWS"

शहरी ढांचे में सुधार के लिए प्रदेश के सभी शहरों में सिटी पार्क और पिंक टॉयलेट की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। इसके साथ ही अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी जरूरत के हिसाब से पिंक टॉयलेट विकसित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अगली समीक्षा बैठक तक इस लक्ष्य का 70 प्रतिशत काम पूरा करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

यह भी पढ़ें -  22 करोड़ के गबन मामले में हाईकोर्ट सख्त: पुलिस रिपोर्ट अस्पष्ट घोषित,CBI से सील बंद लिफाफे में मांगी राय

शहरों में पार्किंग की गंभीर समस्या से निपटने के लिए MDDA और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण को PPP मॉडल पर कार्ययोजना बनाने को कहा गया है। वहीं, पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो-तीन प्राधिकरणों में ‘लैंड पूलिंग योजना’ लागू की जाएगी, जिससे किसानों और भूमि मालिकों को पारदर्शी तरीके से लाभ दिया जा सके।

अंत में मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों की वेबसाइटों को आम जनता के लिए सरल और सिटीजन फ्रेंडली बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को नक्शा स्वीकृति, शुल्क और नियमों की जानकारी ऑनलाइन आसानी से मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि प्राधिकरणों की जिम्मेदारी केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे जुड़े ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।