नई दिल्ली। नई दिल्ली में आरक्षण विरोधी आंदोलन और अगड़ा वर्ग की बढ़ती नाराजगी के बीच भारतीय जनता पार्टी के भीतर सवर्ण आयोग के गठन की मांग तेज हो गई है। पार्टी सांसदों के एक समूह ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और कुछ वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की है। हालांकि, इस बैठक के बाद सांसदों को सरकार की ओर से फिलहाल कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में हुए ‘जेन-जी आंदोलन’ और बांकीपुर व दतिया उपचुनाव के निराशाजनक नतीजों के बाद पार्टी के अंदर यह मांग जोर पकड़ रही है। सांसदों का मानना है कि उपचुनावों में अगड़ा वर्ग के असंतोष का सीधा असर पड़ा है, जिसे साधने के लिए सवर्ण आयोग का गठन बहुत जरूरी हो गया है।
जेपी नड्डा से मिलने पहुंचे सांसदों के समूह का कहना है कि सवर्ण आयोग के गठन से पार्टी के पारंपरिक अगड़ा वर्ग समर्थकों में एक सकारात्मक संदेश जाएगा। इससे पहले आरक्षण विरोधी आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं ने भी नड्डा से मुलाकात कर सवर्ण समाज की चिंताओं और मांगों को उनके सामने रखा था।
देशभर में एक तरफ आरक्षण विरोधी आंदोलन की आंच महसूस की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर उठी इस मांग ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। बांकीपुर और दतिया उपचुनाव के नतीजों के बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी अगड़ा वर्ग के रुख को लेकर नए सिरे से मंथन कर रहा है।
सांसदों के इस वर्ग ने नेतृत्व को आगाह किया है कि जेन-जी आंदोलन से पैदा हुई परिस्थितियों को समय रहते संभाला जाना चाहिए। सवर्ण आयोग बनने से इस वर्ग की समस्याओं और मांगों को एक वैधानिक मंच मिल सकेगा। फिलहाल, सवर्ण आयोग के गठन को लेकर केंद्र सरकार या भाजपा नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। केंद्रीय नेतृत्व पूरे घटनाक्रम और इसके राजनीतिक असर पर बारीक नजर बनाए हुए है।

